नेपाल सरकार का बड़ा फैसला, मातृत्व अवकाश 6 महीने और पिता को मिलेगी 42 दिन की छुट्टी.

नेपाल सरकार ने कामकाजी माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है, जिसके तहत देश में मातृत्व और पितृत्व अवकाश की समयसीमा को काफी ज्यादा बढ़ाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस नए बदलाव के बाद अब नेपाल में कामकाजी माताओं को मिलने वाली छुट्टियों की अवधि को सीधे तीन महीने से बढ़ाकर पूरे छह महीने यानी 186 दिन कर दिया जाएगा, जो कि परिवारों के लिए बहुत बड़ी राहत साबित होगी। इसके साथ ही सरकार ने नवजात शिशु के जन्म के बाद पिता की जिम्मेदारी को समझते हुए उनके लिए भी पितृत्व अवकाश को 15 दिन से बढ़ाकर सीधे 42 दिन करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव तैयार कर लिया है, ताकि माता-पिता दोनों मिलकर अपने बच्चे की देखभाल ठीक तरह से कर सकें।
कानून में संशोधन की तैयारी
कानून, न्याय एवं संसदीय मामलों की मंत्री सोविता गौतम के अनुसार, सुरक्षित मातृत्व तथा प्रजनन स्वास्थ्य अधिकार अधिनियम, 2018 में जरूरी संशोधन करने के लिए एक नया विधेयक पूरी तरह से तैयार कर लिया गया है और मंत्रालय की तरफ से इसे जल्द ही आगे बढ़ाया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के तहत मंत्रालय इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद सीधे संसद में पेश करने की पूरी तैयारी कर रहा है, ताकि इसे जल्द से जल्द कानून का रूप दिया जा सके। इस नए प्रस्तावित विधेयक के लागू हो जाने के बाद देश की सभी कामकाजी माताओं को कम से कम 6 महीने का पूरा वेतन सहित मातृत्व अवकाश मिलेगा और साथ ही पिताओं को भी 42 दिनों तक का सवैतनिक प्रसूति देखभाल अवकाश आसानी से मिल सकेगा, जिससे उनके घर की आर्थिक स्थिति पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
क्यों उठाया गया यह कदम
आज के समय में भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का लगातार बढ़ता हुआ दबाव और पूरी तरह से बदल चुकी जीवनशैली की वजह से देश के अधिकांश परिवार अब केवल एक या फिर दो बच्चों तक ही खुद को सीमित रखने लगे हैं। ऐसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह महसूस किया है कि माता-पिता को अपने नवजात शिशु और अपने पूरे परिवार के साथ बिताने के लिए पर्याप्त समय मिलना बहुत जरूरी है, ताकि बच्चे का शुरुआती पालन-पोषण बेहतरीन तरीके से हो सके। मंत्री सोविता गौतम ने इस बात पर खास जोर दिया है कि किसी भी महिला के जीवन में बच्चे को जन्म देना एक या दो बार आने वाला बहुत ही विशेष समय होता है और इस दौरान परिवार को पूरा समय उपलब्ध कराना राज्य की भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी साफ किया कि बच्चे को जन्म देना भले ही मां से जुड़ी एक प्राकृतिक प्रक्रिया हो, लेकिन उस बच्चे का पालन-पोषण करना केवल अकेली मां की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह माता-पिता दोनों की एक साझा जिम्मेदारी बनती है जिसे दोनों को मिलकर निभाना चाहिए।