नेपाल: लापता व्यक्तियों को मृत घोषित करने की समय सीमा 12 साल से घटाकर 45 दिन करने का प्रस्ताव

नेपाल सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए लापता व्यक्तियों को कानूनी रूप से मृत घोषित करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया है। बुधवार को सिंह दूर्बार में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान एक अध्यादेश लाने की सिफारिश की गई, जिसका उद्देश्य उन कानूनी बाधाओं को दूर करना है जो पीड़ित परिवारों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही थीं। इस नए प्रस्ताव के तहत, नेपाल लापता व्यक्ति कानून में बड़ा बदलाव किया जाएगा, जिससे अब किसी व्यक्ति के गायब होने के 12 साल बाद के बजाय मात्र 45 दिनों के भीतर उसे मृत घोषित किया जा सकेगा।
सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा मंत्री सस्मित पोखरेल ने पत्रकारों को बताया कि यह फैसला विशेष रूप से भोटेकोशी बाढ़ की त्रासदी को देखते हुए लिया गया है। अगस्त के महीने में नेपाल ने एक भयानक "हिमालयन सुनामी" का सामना किया, जो चट्टानों और बर्फ के भूस्खलन के कारण आई थी। इस प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई, जिसमें अब तक 1,400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 6,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।
बाढ़ से मची तबाही और पुनर्निर्माण की चुनौती
26 अगस्त को रसुवा जिले के नदी किनारे बसे इलाकों में आई इस अचानक बाढ़ ने नुवाकोट और धाडिंग जैसे पड़ोसी क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले लिया। ग्लेशियर फटने के कारण आई इस विनाशकारी बाढ़ ने तिब्बत की सीमा से लगे ऊंचे ढलानों पर बसे बस्तियों को पूरी तरह तबाह कर दिया। तिमुरे और स्याफ्रु बेसी जैसे प्रमुख इलाके इस सैलाब में पूरी तरह बह गए। इस आपदा ने करीब 70,000 लोगों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है, जिनमें से बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए हैं।
नुकसान केवल जान-माल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बुनियादी ढांचे को भी भारी चोट पहुंची है। इस आपदा में 8 चालू और 4 निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है, जिससे बिजली उत्पादन क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा, पृथ्वी राजमार्ग और गलछी-बेतरावती-रसुवागढ़ी सड़क के बड़े हिस्से नष्ट हो गए हैं और 48 सस्पेंशन ब्रिज व 31 मोटर योग्य पुल ढह गए हैं। अनुमान है कि इस बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में कम से कम एक दशक का समय लगेगा और इसके लिए लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आवश्यकता होगी।