Nepal Earthquake: नेपाल के मुगु जिले में ढाई घंटे के भीतर आए दो भूकंप, लोग डरे.

पड़ोसी देश नेपाल से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां धरती एक बार फिर अचानक कांप उठी है। नेपाल के मुगु जिले को केंद्र मानकर बुधवार तड़के करीब ढाई घंटे के अंतराल में दो बार भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस अचानक हुई हलचल से स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया है और लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। सुबह-सुबह आए इन झटकों ने लोगों की नींद उड़ा दी और हर कोई सुरक्षित स्थानों की तरफ देखने लगा।
राष्ट्रीय भूकंप मापन केंद्र की रिपोर्ट
राष्ट्रीय भूकंप मापन एवं अनुसंधान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, मुगु के कालै क्षेत्र को केंद्रबिंदु बनाकर रात 1 बजकर 51 मिनट पर पहला झटका आया जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई। इसके ठीक कुछ देर बाद सुबह 4 बजकर 28 मिनट पर उसी इलाके के आसपास 4.2 तीव्रता का दूसरा भूकंप दर्ज किया गया। केंद्र के वरिष्ठ भूकंपविद् डॉ. लोकविजय अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है और बताया कि दोनों भूकंपों के बीच समय का अंतर लगभग ढाई घंटे का था।
बड़े नुकसान की आशंका नहीं लेकिन सतर्क रहना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि 4.5 और 4.2 तीव्रता के इन भूकंपों से आमतौर पर किसी भी बड़े नुकसान या भारी तबाही की संभावना बहुत कम होती है। हालांकि, इतने पर भी आम जनता को पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि प्राकृतिक आपदा का कोई भरोसा नहीं होता। डॉक्टर अधिकारी ने विस्तार से बताया कि हर बड़े भूकंप के बाद छोटे-छोटे झटके यानी पराकंप आते रहते हैं। यदि किसी इलाके में 4 तीव्रता का मुख्य झटका आता है, तो उसके बाद 3, 2 और 1 तीव्रता के कई अन्य छोटे भूकंप भी महसूस किए जा सकते हैं जो धरती के भीतर की ऊर्जा को शांत करने का काम करते हैं।
मुस्तांग जिले का हाल और पुराने झटके
प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े लोग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों ने याद दिलाया कि पिछले सप्ताह ही मुस्तांग जिले में भी भूकंप के तेज झटके लगे थे। बीते 8 सितंबर की रात 9 बजकर 53 मिनट पर मुस्तांग में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया था जिसके झटके दूर राजधानी काठमांडू तक महसूस किए गए थे। उस घटना के बाद से लेकर अब तक उस क्षेत्र में लगभग 20 से 22 बार आफ्टरशॉक या छोटे पराकंप दर्ज किए जा चुके हैं। नेपाल भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है जहां इस तरह की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं और लोग अब इन हालात का सामना करने के लिए पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं।