नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ का कहर, नारायणी नदी से मिले 233 शवों में सिर्फ चार की हुई पहचान.

नेपाल के चितवन स्थित नारायणी नदी से बरामद किए गए कुल 233 शवों में से अब तक केवल चार लोगों की ही पहचान हो पाई है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद से पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं और उनके परिजन अपनों की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। प्रशासन और पुलिस लगातार शवों की पहचान करने और उन्हें उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है, लेकिन हालात बेहद कठिन बने हुए हैं।
पुलिस अधिकारियों और आम नागरिकों की हुई पहचान
जिला पुलिस कार्यालय चितवन के प्रमुख एसपी रामेश्वर पौडेल ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिन चार शवों की पहचान अब तक हो सकी है, उनमें से तीन शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। एक अन्य व्यक्ति की पहचान तो हो चुकी है, लेकिन उसके परिजन विदेश में होने के कारण अभी तक शव को अपने साथ नहीं ले जा पाए हैं। बेत्रावती पुलिस चौकी के पुलिस सहायक निरीक्षक यानी एएसआई रामकाजी पौडेल का शुक्रवार को पूरे राजकीय और पारिवारिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। नारायणी नदी में उनका शव मिलने के बाद परिवार ने देवघाट में उनका अंतिम संस्कार किया।
बेत्रावती पुलिस चौकी पर कुल 10 पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। जब इलाके में अचानक भयानक बाढ़ आई, तो उनमें से 9 पुलिसकर्मी तो किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब हो गए, लेकिन एएसआई रामकाजी पौडेल तेज पानी के बहाव में लापता हो गए थे। उनके अलावा बांके जिले के रहने वाले कविराज चौधरी का शव भी चितवन से ही बरामद किया गया है, जिसे उनके परिजनों ने शुक्रवार को ही प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही मकवानपुर के रहने वाले रमेश मगर और रसुवा जिले के भुवन थापा मगर के शव भी चितवन में ही मिले हैं। रमेश के परिवार ने तो अपना शव ले लिया है, लेकिन विदेश में रह रहे भुवन के परिजन शनिवार को नेपाल लौटने की तैयारी कर रहे हैं ताकि वे अपने स्वजन का अंतिम संस्कार कर सकें।
अस्पताल में जगह की कमी के चलते उद्योग वाणिज्य संघ में रखे गए शव
चितवन में अभी भी कुल 230 शव बचे हुए हैं, जिनमें से 77 शवों को अस्पताल के बाहर सुरक्षित रखना पड़ा है। एसपी रामेश्वर पौडेल के मुताबिक, इन शवों को रखने के लिए स्थानीय उद्योग वाणिज्य संघ के परिसर का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पतालों में शवों को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची थी, जिस वजह से 77 शवों को वाणिज्य संघ के परिसर में स्थानांतरित करना पड़ा। वहां इन शवों को सुरक्षित रखने के लिए बर्फ का खास इंतजाम किया गया है ताकि वे जल्द खराब न हों।
प्रशासन को केवल पूरे शव ही नहीं मिले हैं, बल्कि चितवन में अब तक कुल 62 हाथ, पैर और शरीर के अन्य पंजे भी बरामद किए गए हैं। इन अंगों को भी उद्योग वाणिज्य संघ के इसी परिसर में सुरक्षित रखा गया है ताकि डीएनए टेस्ट या अन्य तरीकों से बाद में उनकी पहचान सुनिश्चित की जा सके। पुलिस विभाग की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अकेले भरतपुर अस्पताल के अंदर ही 158 शवों को रखा गया है। इसके अलावा बाकी बचे हुए शव नारायणी अस्पताल, नेशनल सिटी अस्पताल और स्थानीय सामुदायिक अस्पताल में सुरक्षित रखे गए हैं, जहां पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी रख रही हैं।
रसुवा की बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर हुई 579
बुधवार की सुबह रसुवा जिले में जो विनाशकारी बाढ़ आई थी, उसके कारण मरने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर अब 579 तक जा पहुंची है। इस भयानक जलप्रलय के बाद से सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में सुरक्षा बलों और राहत एजेंसियों का सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। सरकार और स्थानीय प्रशासन लापता लोगों की तलाश के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद पहुंचाने का काम कर रहा है, ताकि इस मुश्किल घड़ी में उन्हें कुछ राहत मिल सके। इस पूरी आपदा की विस्तृत जानकारी हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से सामने आई है, जहाँ पत्रकार पंकज दास ने ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग करते हुए इन सभी आंकड़ों की पुष्टि की है।