नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह संयुक्त राष्ट्र में उठाएंगे जलवायु न्याय और मुआवजे का बड़ा मुद्दा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह जलवायु परिवर्तन से देश को हुए नुकसान के मुआवजे का मुद्दा पूरी मजबूती के साथ उठाने की तैयारी कर रहे हैं। न्यूयॉर्क में आगामी 24 सितंबर को महासभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शाह जलवायु न्याय और क्षतिपूर्ति से जुड़े पांच प्रमुख एजेंडे दुनिया के सामने रखेंगे। इस यात्रा के तहत प्रधानमंत्री 22 सितंबर को न्यूयॉर्क के लिए रवाना होंगे, जबकि उनसे पहले विदेश मंत्री शिशिर खनाल 20 सितंबर को ही न्यूयॉर्क पहुंच जाएंगे ताकि सभी तैयारियों को समय पर पूरा किया जा सके।
जलवायु परिवर्तन और नेपाल की समस्याएं
विदेश सचिव अमृत बहादुर राई के मुताबिक प्रधानमंत्री शाह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस गंभीर विषय पर आकर्षित करेंगे कि किस तरह जलवायु परिवर्तन और उससे पैदा होने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारण नेपाल को बार-बार बड़े पैमाने पर जानमाल के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। नेपाल का कुल कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होने के बावजूद उसे जलवायु परिवर्तन के सबसे ज्यादा और गंभीर दुष्प्रभावों को झेलना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री वैश्विक समुदाय के सामने यह बात मजबूती से रखेंगे कि जलवायु न्याय हर विकासशील और पर्वतीय देश का अधिकार है और नेपाल को इस संकट से उबरने के लिए तत्काल और उचित क्षतिपूर्ति मिलनी चाहिए।
मुआवजे की मांग और फंड की स्थिति
नेपाल सरकार पहले ही देश में जलवायु आपदाओं से हुए भारी नुकसान के लिए 2 करोड़ अमेरिकी डॉलर के मुआवजे की आधिकारिक मांग कर चुकी है। सरकारी अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार नेपाल की इस महत्वपूर्ण मांग पर लॉस एंड इसके अलावा फंड की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिल चुकी है। इसके अलावा नेपाल विकसित और समृद्ध देशों से यह भी अपील करेगा कि वे जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद करें। साथ ही क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि को बढ़ावा देने और संबंधित पक्षों की क्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक आधुनिक तकनीक तथा जलवायु वित्त को बहुत ही आसान और रियायती शर्तों पर उपलब्ध कराया जाए ताकि आम लोगों का जीवन सुरक्षित हो सके।
पर्यावरण संरक्षण में नेपाल का योगदान
महासभा के इस बड़े मंच पर नेपाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पर्यावरण संरक्षण में दिए जा रहे अपने अहम योगदान को भी प्रस्तुत करेगा। इसमें प्रकृति के अनुकूल जीवनशैली, 46 प्रतिशत से अधिक का विशाल वन क्षेत्र, नेपाल का विशाल हिमालयी क्षेत्र और व्यापक नदी प्रणाली शामिल है, जिसके जरिए देश वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में अपनी बड़ी भूमिका निभा रहा है। विदेश सचिव अमृत बहादुर राई ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा नेपाल के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने पिछले वर्ष हुए जेन-जी आंदोलन, उसके बाद संपन्न हुए सफल चुनावों और बड़े जनादेश के साथ बनी वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं को रखने का सबसे महत्वपूर्ण अवसर है। इसके साथ ही नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आपसी सद्भावना को लगातार जारी रखने तथा उसे और अधिक बढ़ाने का आह्वान भी किया है।
सगरमाथा से समुद्र तक का विशेष अभियान
संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यक्रमों के दौरान नेपाल की तरफ से ‘सगरमाथा से समुद्र तक : जलवायु उत्थानशील भविष्य के लिए आह्वान’ शीर्षक से एक अलग बैठक का आयोजन भी किया जाएगा। इस विशेष बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों और उससे पैदा होने वाली विनाशकारी परिस्थितियों पर खुलकर चर्चा करना है। इस मंच के माध्यम से नेपाल पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश देने की तैयारी में है कि भले ही जलवायु संकट को पैदा करने में उसकी अपनी भूमिका बेहद कम है, लेकिन इसके भयंकर दुष्परिणामों का पूरा बोझ नेपाल जैसे पर्वतीय और विकासशील देशों को अकेले ही उठाना पड़ रहा है।