नेपाल आपदा पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का यूएन में बड़ा बयान, कहा राजनीति से ऊपर उठकर सोचें सभी

संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा में नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने दुनिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि नेपाल देश में आई प्राकृतिक आपदा को किसी भी तरह की भू-राजनीतिक खींचतान या आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा नहीं बनने देगा। प्रधानमंत्री के इस स्पष्ट संदेश से अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बात रखी गई कि संकट के इस समय में राजनीति करने के बजाय मानव जीवन को बचाना और जलवायु परिवर्तन से मिलकर निपटना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। दुनिया भर के बड़े नेताओं के बीच नेपाल ने अपने यहां हुई तबाही का दर्द साझा किया और सभी देशों से अपनी जिम्मेदारी निभाने की पुरजोर अपील की।
आपदा में जा चुकी है 1,400 से अधिक लोगों की जान
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने संबोधन के दौरान जानकारी दी कि नेपाल में हाल ही में आई गंभीर आपदाओं के कारण अब तक 1,400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इतने बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान से पूरा देश गहरे संकट से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि किस तरह से प्राकृतिक आपदाएं आम लोगों का जीवन तहस-नहस कर देती हैं। नेपाल सरकार अपने स्तर पर हरसंभव राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है, लेकिन इस तरह की समस्याओं से स्थायी रूप से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग की बहुत ज्यादा जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब लोग अपनों को खो रहे हैं, तब देशों को आपस में लड़ने के बजाय एक-दूसरे का हाथ थामना चाहिए।
जलवायु परिवर्तन और हिमालय क्षेत्र की सुरक्षा पर जोर
अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए नेपाली प्रधानमंत्री ने दुनिया का ध्यान हिमालयी क्षेत्रों की तरफ खींचा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिमालयी क्षेत्र को कभी भी तनाव या झगड़े का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके विपरीत, इस क्षेत्र को भविष्य में आने वाले संभावित बड़े खतरों और नुकसान को रोकने के लिए एक साझा प्रयोगशाला के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि सभी पड़ोसी देशों और वैश्विक समुदाय को मिलकर काम करना चाहिए। इसके लिए उन्होंने हिमालय क्षेत्र से जुड़े भू-सूचना आंकड़ों, उपग्रह संबंधी जानकारियों और तकनीकी विशेषज्ञता को आपस में खुलकर साझा करने की सख्त आवश्यकता बताई, ताकि समय रहते किसी भी बड़े खतरे की चेतावनी मिल सके और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।