नेपाल के प्रधानमंत्री का बड़ा बयान, कहा हथियार जल्दी मिलते हैं लेकिन किसानों को खाद नहीं.

दुनियाभर में इन दिनों वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है और नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस पर बड़ा सवाल उठाया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोलते हुए कहा कि आज की दुनिया में हथियारों की सप्लाई के लिए तो बहुत तेज और असरदार सिस्टम काम करता है, लेकिन किसानों के खेतों के लिए खाद और ईंधन समय पर नहीं पहुंच पाता है। यह बात उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की 81वीं महासभा को संबोधित करते हुए कही, जो शुक्रवार की सुबह आयोजित की गई थी। उनके इस बयान के बाद पूरी दुनिया में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि कैसे वैश्विक स्तर पर प्राथमिकताओं को तय करने में बड़ी चूक हो रही है और आम इंसान की जरूरतें पीछे छूट रही हैं।
युद्ध के लिए बेहतरीन सिस्टम और खाने के लिए बिखरी व्यवस्था
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपनी बात को खुलकर रखते हुए कहा कि दुनिया भर में हथियारों को भेजने का इंतजाम इतना तगड़ा है कि अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल, राइफल और तमाम तरह के गोला-बारूद तय समय पर दुनिया के किसी भी कोने में आसानी से पहुंचा दिए जाते हैं। इसके विपरीत, नेपाल जैसे विकासशील देशों के किसानों को जरूरत के वक्त बाजार में सही कीमत देने पर भी न तो समय पर खाद मिलती है और न ही ईंधन मिल पाता है। उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि हमने एक ऐसी दुनिया बना ली है जहां युद्ध के साजो-सामान के लिए तो एकदम सटीक लॉजिस्टिक्स प्रणाली मौजूद है, लेकिन इंसानों का पेट भरने वाले खाद्य पदार्थों और कृषि से जुड़ी चीजों के लिए बेहद बिखरी हुई और कमजोर व्यवस्था काम कर रही है। उनका यह साफ कहना था कि जिस भी देश के लोग किसी जरूरी वस्तु की सही कीमत चुकाने को तैयार हैं, उन्हें वह चीज खरीदने का पूरा मौका मिलना चाहिए।
जलवायु परिवर्तन और गरीब देशों पर बढ़ता दबाव
नेपाल के प्रधानमंत्री ने इस पूरे मुद्दे को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था और जलवायु न्याय के साथ जोड़ते हुए एक गंभीर सच्चाई सामने रखी। उन्होंने बताया कि आज के समय में कमजोर और विकासशील देशों के आम नागरिकों को उन बड़े संकटों का बोझ जबरन उठाना पड़ रहा है, जिन्हें उन्होंने खुद पैदा ही नहीं किया है। पूरी दुनिया में जलवायु बदलाव का सबसे बुरा असर नेपाल जैसे पहाड़ी और विकासशील देशों पर पड़ रहा है। इसके अलावा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही लगातार कमियां और खामियां गरीब आबादी की जेब और उनकी जिंदगी पर अतिरिक्त दबाव बना रही हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी तर्क दिया कि जब आज की तकनीक इतनी आगे है कि वह केवल 72 घंटे के भीतर दुनिया के किसी भी हिस्से में हथियार पहुंचा सकती है, तो फिर किसानों को उनकी सम्मानजनक आजीविका के साधनों से महरूम रखने के लिए दुनिया के पास कोई भी बहाना नहीं होना चाहिए। इस पूरी जानकारी की पुष्टि हिन्दुस्थान समाचार एजेंसी के माध्यम से मिली है, जिसमें पंकज दास की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है।