नेपाल में प्रथिनी हाईवे का हिस्सा ढहा, ग्लेशियर बाढ़ से मरने वालों की संख्या हुई 784.

नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हालात बेहद खराब चल रहे हैं और ताजा घटनाक्रम में 30 अगस्त 2026 को धाडिंग के कृष्णभीर इलाके में Prithvi Highway का एक जरूरी हिस्सा पूरी तरह से ढह गया है। यह बड़ा सड़क धंसने का मामला तब सामने आया जब चार दिन पहले आए एक भयानक ग्लेशियर आउटबर्स्ट के बाद त्रिशूल नदी का जलस्तर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया था। काठमांडू वैली ट्रैफिक ऑफिस के प्रवक्ता Nareshraj Subedi ने मीडिया को जानकारी दी कि नदी के पानी का स्तर आधे घंटे के भीतर नौ मीटर तक ऊपर उठ गया था, जिसके कटाव के कारण सड़क का यह हिस्सा बह गया और इस रास्ते पर सभी गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है।
सड़क पूरी तरह बीच से कटी, पैदल चलना भी मना
धाडिंग डिस्ट्रिक्ट पुलिस के डीएसपी Prakash Dahal ने बताया कि सड़क बीचों-बीच तक अंदर धंस चुकी है और हालात इतने खतरनाक हैं कि किसी भी आम आदमी या पैदल यात्री को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। नेपाल और तिब्बत के इस पूरे इलाके में इस भीषण आपदा की वजह से मरने वालों की कुल संख्या 750 से 784 के बीच पहुंच चुकी है। इसके अलावा 3,000 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें अकेले नेपाल से 2,498 और तिब्बत से 546 लोग शामिल हैं। बचाव दलों को इस काम में जुटे हुए आज पांचवां दिन पूरा हो गया है और उनका पूरा ध्यान त्रिशूली 3ए और 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे करीब 100 कामगारों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है।
टनल में फंसे लोगों को दी जा रही है हवा
गृह मंत्री Sudan Gurung ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि प्रशासन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा है और छोटे छेदों के जरिए सुरंगों के अंदर हवा पंप की जा रही है ताकि अंदर फंसे लोगों को सांस लेने में मदद मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके। यूनाईटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे यानी USGS ने साफ किया है कि यह कोई भूकंपीय घटना नहीं थी बल्कि एक मेग्नीट्यूड 5.2 का ग्लेशियर ढहने और मलबा बहने का मामला था जिसकी वजह से इतनी भारी तबाही देखने को मिली है। नेपाल सरकार का अनुमान है कि इस आपदा से देश को कुल Rs 200 billion से ज्यादा का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। इसमें केवल सड़क और पुल के ढांचे को हुआ नुकसान ही Rs 15 billion तक पहुंच चुका है, जिसके तहत 42 kilometers लंबी सड़कें और 41 पुल पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
भारत और चीन से मांगी गई मदद
सरकार के प्रवक्ता Sasmit Pokharel ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत और चीन से आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी गई है, जिसके बाद भारत ने पहले ही 68.5 tonnes राहत सामग्री और टनल रेस्क्यू के लिए विशेष टीमों को नेपाल भेज दिया है। लगातार जारी मानसूनी बारिश और भोटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियों ने राहत कर्मियों को बहुत ज्यादा सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे हादसे और इसके बाद के जोखिमों को लेकर अधिकारी आईसीआईएमओडी और विश्व मौसम विज्ञान संगठन यानी World Meteorological Organization जैसी बड़ी संस्थाओं के साथ मिलकर लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं, जिसकी विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं।