नेपाल ने भारत समेत 13 देशों के लिए नए राजदूतों के नाम किए तय, जानिए पूरी सूची.

नेपाल सरकार ने देश के अलग-अलग राजनयिक मिशनों में खाली पदों को भरने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक अहम मंत्रिपरिषद की बैठक हुई, जिसमें कुल 13 देशों के लिए नए राजदूतों के नाम प्रस्तावित किए गए हैं। इस सूची में भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन और सऊदी अरब जैसे कई महत्वपूर्ण देश शामिल हैं, जहां अब नए राजनयिकों की तैनाती की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इन देशों के लिए तय किए गए हैं नाम
सामने आई सूची के मुताबिक, नेपाल सरकार ने अलग-अलग देशों के लिए योग्य और अनुभवी चेहरों को चुना है। भारत के लिए डाॅ. निश्चलनाथ पांडे का नाम प्रस्तावित किया गया है। इसके अलावा चीन के लिए डाॅ. कल्याणराज शर्मा, अमेरिका के लिए चिरनजंग थापा और ब्रिटेन के लिए पूर्व प्रधान सेनापति सेवानिवृत्त गौरव शम्शेर जंगबहादुर राणा का नाम आगे बढ़ाया गया है। जापान के लिए जिग्यान कुमार थापा, इज़रायल के लिए सुरेश कुमार कर्ण, स्पेन के लिए प्राप्ति शेरचन और जर्मनी के लिए शारू जोशी को चुना गया है। ओमान के लिए डाॅ. पद्माक्षी राणा, मलेशिया के लिए चूडामणि खरेल, दक्षिण कोरिया के लिए प्रो. डाॅ. संगम श्रेष्ठ, श्रीलंका के लिए डाॅ. मंचल झा और सऊदी अरब के लिए गिरी बहादुर सुनार के नाम पर मुहर लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
आगे की क्या है प्रक्रिया
सरकार द्वारा नामों की घोषणा के बाद अब नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन सभी प्रस्तावित नामों पर सबसे पहले संसद में सुनवाई होगी। संसदीय सुनवाई और वहां से स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित देशों से इन राजदूतों के लिए एग्रिमो यानी औपचारिक सहमति ली जाएगी। इन सभी चरणों के पूरा होने के बाद देश के राष्ट्रपति की तरफ से औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी किया जाएगा, जिसके बाद यह पूरी प्रक्रिया संपन्न मानी जाएगी।
लंबे समय से खाली थे पद
नेपाल के कई ऐसे दूतावास और राजनयिक मिशन हैं जहां राजदूत के पद पिछले काफी समय से खाली पड़े थे। इस वजह से कूटनीतिक कामकाज में भी कुछ परेशानियां आ रही थीं। सरकार ने फिलहाल शुरुआती चरण में 13 देशों के लिए अपने प्रतिनिधियों के नाम आगे बढ़ाए हैं। अधिकारियों का कहना है कि बाकी बचे हुए अन्य रिक्त मिशनों के लिए भी नियुक्ति की प्रक्रिया को बहुत जल्द ही आगे बढ़ाया जाएगा ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक संबंधों को और ज्यादा मजबूत किया जा सके।