नेपाल में मानवीय संवेदनाएं तार-तार, पैसे न होने पर अस्पताल ने नहीं किया भर्ती तो महिला ने सड़क किनारे दिया बच्चे को जन्म.

पैसे के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं के मिलने से इंकार करने का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है जहाँ नेपाल के राजविराज में एक गरीब महिला को मजबूरी में अस्पताल के बाहर फुटपाथ पर बच्चे को जन्म देना पड़ा। पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रशासन ने सिर्फ इसलिए महिला को भर्ती करने से मना कर दिया क्योंकि उनके पास इलाज और जांच के लिए पैसे नहीं थे। यह घटना इस बात को उजागर करती है कि कैसे कई बार पैसों की कमी किसी इंसान की जिंदगी पर भारी पड़ जाती है और सरकारी व्यवस्थाएं जरूरतमंदों की मदद करने से पीछे हट जाती हैं। इस अमानवीय घटना के सामने आने के बाद से ही आम जनता में भारी गुस्सा देखा जा रहा है और सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ इस बात की आलोचना हो रही है।
घटना की पूरी कड़वी सच्चाई और रात का वह वक्त
यह पूरी घटना 10 सितंबर की सुबह तड़के करीब ढाई बजे की बताई जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 9 सितंबर की रात करीब डेढ़ बजे गर्भवती महिला बबिता पासवान को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद उनके पति हरेराम पासवान और सास के रिश्ते की दो महिलाएं तुरंत उन्हें लेकर एक सिटी रिक्शा से नजदीकी अस्पताल पहुंचे। अस्पताल पहुंचने पर प्रसूति विभाग में तैनात स्टाफ नर्स ने बिना मरीज की हालत देखे सबसे पहले बाहर से अल्ट्रासाउंड और प्रयोगशाला में खून तथा पेशाब की जांच कराने को कह दिया। अस्पताल के नियमों के हिसाब से इन सभी जांचों के लिए कुल करीब 2,500 नेपाली रुपये का खर्च बताया गया जो उस गरीब परिवार के लिए जुटाना उस वक्त बहुत मुश्किल था।
गरीबी बनी इलाज में सबसे बड़ी रुकावट
फुटपाथ पर बच्चे को जन्म देने वाली महिला राजविराज नगरपालिका पर्साही की रहने वाली हैं। महिला के पति हरेराम पासवान आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं और उनके पास उस समय अस्पताल की बताई गई जांच के पैसे नहीं थे। पीड़िता बबिता ने मीडिया को बताया कि वह अत्यंत गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह तुरंत डॉक्टर की मांग पूरी कर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले उनके तीन बच्चों का जन्म सामान्य तरीके से हुआ था और उस समय किसी भी तरह की महंगी बाहरी जांच की जरूरत नहीं पड़ी थी। बबिता का सीधा आरोप है कि जब उन्होंने अपनी मजबूरी बताई और पैसे न होने का जिक्र किया तो नर्स ने उनकी एक नहीं सुनी और बिना जांच के अस्पताल में डिलीवरी करने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उन्हें डांटकर अस्पताल से बाहर भगा दिया जिसके बाद उन्हें मजबूरन अस्पताल के बाहर सर्द रात में सड़क किनारे फुटपाथ पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा।
सरकार और अस्पताल प्रशासन पर उठ रहे हैं कड़े सवाल
सरकारी अस्पताल के ठीक सामने सड़क के किनारे एक महिला के इस तरह बच्चे को जन्म देने का वीडियो जब सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आया तो चारों तरफ हड़कंप मच गया। इस घटना के बाद नेपाल सरकार और संबंधित अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों ने इस मामले में संवेदनहीनता दिखाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों और अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या पैसों के बिना किसी गरीब की जान की कोई कीमत नहीं है और क्या सरकारी अस्पताल केवल अमीर लोगों के इलाज के लिए ही बने हैं। इस मामले में अभी तक किसी भी बड़े सरकारी अधिकारी या मंत्री की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन जनता के बीच इस घटना को लेकर भारी रोष बना हुआ है।