नेपाल सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी.

Praggya Singh sabal16 September 20262 min read30 viewsEnglish
नेपाल सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी.

नेपाल की राजनीति और कानून व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ देश के सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि देश के संविधान में किसी भी तरह का संशोधन करने के लिए संसद के दोनों यानी निचले और ऊपरी दोनों सदनों में अलग-अलग दो-तिहाई बहुमत मिलना अनिवार्य होगा। इस फैसले के बाद अब सरकार के लिए संवैधानिक बदलाव करना थोड़ा मुश्किल हो गया है क्योंकि इसके लिए पूरी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने नियमों पर लगाई रोक

मिली जानकारी के अनुसार, नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. मनोज कुमार शर्मा और अन्य न्यायमूर्तियों की पांच सदस्यीय संवैधानिक बेंच ने सुनवाई करते हुए प्रतिनिधि सभा के नियम यानी Rules of HoR, 2083 के दो प्रावधानों को तुरंत प्रभाव से लागू करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि नियम 140(11) और नियम 259 को अभी लागू नहीं किया जाएगा। अदालत का मानना है कि ये दोनों नियम पहली नजर में देश के संविधान के खिलाफ प्रतीत होते हैं और इनके कारण संवैधानिक प्रावधानों को नुकसान पहुंच सकता है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

किसने दाखिल की थी याचिका

यह पूरा मामला तब सामने आया जब नेपाली कांग्रेस की नेशनल असेंबली की संसदीय दल की नेता कमला देवी पंत और अन्य लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी। इस याचिका में प्रतिनिधि सभा के नियमों में संशोधन और प्रमाणीकरण से जुड़ी प्रक्रियाओं को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ये नए नियम संविधान के अनुच्छेद 1, 104(1) और 274 के साथ मेल नहीं खाते हैं। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने defendants को सात दिनों के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जैसे ही लिखित जवाब मिल जाएंगे या उनकी समय सीमा खत्म हो जाएगी, उसके 15 दिनों के भीतर इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया है कि संविधान ही नेपाल का सबसे बड़ा और बुनियादी कानून है। अदालत के अनुसार, यदि कोई भी नियम संविधान के खिलाफ जाता है, तो उसे उस हद तक अमान्य माना जाएगा। इस मामले की अंतिम सुनवाई के बाद ही इन नियमों की वैधता पर पूरी तरह से मुहर लगेगी।

Share:

Comments

Leave a comment