नेपाल और तिब्बत में बर्फीले तूफान और हिमस्खलन से तबाही, 1500 से ज्यादा लोग हुए लापता.

Nura Basta27 August 20263 min read61 viewsWorld
नेपाल और तिब्बत में बर्फीले तूफान और हिमस्खलन से तबाही, 1500 से ज्यादा लोग हुए लापता.

नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके में प्रकृति का बहुत बड़ा कहर देखने को मिला है, जहां एक खतरनाक ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन होने की वजह से 1,500 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैं। यह दर्दनाक घटना बुधवार, 26 अगस्त 2026 को हुई, जिसने पूरे इलाके में भारी तबाही मचा दी है। शुरुआत में ऐसा लगा था कि यह झील फटने की वजह से हुआ है, लेकिन यूएसजीएस (USGS) यानी अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने साफ किया कि नेपाल की तरफ 5.2 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसकी वजह से ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा ढह गया।

नदियों का बहाव रुका और गांवों में भर गया मलबा

ग्लेशियर टूटने की वजह से ल्हेंडे नदी का रास्ता पूरी तरह रुक गया था, जिससे वहां एक अस्थायी झील बन गई। कुछ ही देर में वह झील टूट गई और पानी तथा गाद का सैलाब नीचे की बस्तियों में जा घुसा, जिससे कई इलाके पानी और कीचड़ में डूब गए। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, अकेले नेपाल में 826 लोग लापता हैं, जिनमें कम से कम 579 सैलानी शामिल हैं। वहीं चीनी मीडिया का कहना है कि तिब्बत में 558 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक हैं। इस आपदा में नेपाल के अंदर मरने वालों की संख्या बढ़कर 165 हो गई है, जबकि चीन के अधिकारियों ने 3 लोगों की मौत की पुष्टि की है। लापता होने वाले लोगों में ज्यादातर वे तीर्थयात्री शामिल हैं जो पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा पर जा रहे थे।

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विदेशी नागरिकों की सूची और देशों की प्रतिक्रिया

इस बड़ी आपदा में दुनिया के कई देशों के नागरिक लापता हुए हैं, जिनमें भारत के 133 से 177 लोग, अमेरिका के 47 से 63 लोग, ऑस्ट्रेलिया के 34 लोग, ब्रिटेन के 33 लोग, कनाडा के 24 से 25 लोग, मलेशिया के 55 लोग, यूक्रेन के 53 लोग, न्यूजीलैंड के 5 लोग, जापान, पुर्तगाल के 2 लोग, सिंगापुर के 2 लोग, इटली के 2 लोग और रूस के नागरिक शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने इस बात की पुष्टि की है कि उनके 34 नागरिक लापता हैं और वे संयुक्त राष्ट्र तथा रेड क्रॉस के साथ मिलकर लगातार राहत कार्य पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्बर ने इस मुश्किल समय में मदद के लिए 5 मिलियन पाउंड की सहायता राशि और आपातकालीन बचाव दल भेजने का ऐलान किया है।

राहत और बचाव कार्यों में आ रही है भारी रुकावट

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और अन्य अधिकारी सेना तथा पुलिस के साथ मिलकर राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन टूटी हुई सड़कें, गिरे हुए पुल और खराब संचार नेटवर्क की वजह से बचाव टीमों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली के खंभे और पनबिजली संयंत्र क्षतिग्रस्त होने की वजह से कई इलाकों में लगातार बिजली गुल है। जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग के बिनोद पराजुली ने बताया कि सैटेलाइट तस्वीरों से नदी के ब्लॉक होने की पुष्टि हुई थी। वहीं विशेषज्ञों सास्वत सन्याल और रिजन भक्त कायस्थ ने हिमालयी क्षेत्र के बर्फ तंत्र के कमजोर होने पर चिंता जताई है। फिलहाल प्रशासन ग्यारोंग में अभी भी बनी हुई झील के खतरे पर कड़ी नजर रख रहा है, क्योंकि इससे पहले त्रिशूल नदी का जलस्तर मात्र तीस मिनट में नौ मीटर तक ऊपर उठ गया था।

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