नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से तबाही, 1400 के करीब पहुंची मौतें और हजारों लोग अब भी लापता

नेपाल और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ से स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या लगभग 1,400 तक पहुंच चुकी है और हजारों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। खोज और बचाव अभियान लगातार जारी है ताकि प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके। इस भयानक प्राकृतिक आपदा ने पूरे इलाके में भारी तबाही मचाई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है।
आधिकारिक आंकड़े और लापता लोगों की तलाश
अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 तक नेपाल में 1,341 और तिब्बत में 43 लोगों की जान जाने की पुष्टि हो चुकी है। वहीं, नेपाल सरकार के नवीनतम आंकड़ों में कम से कम 1,342 मौतें दर्ज की गई हैं। इस भयंकर आपदा के बाद पूरे क्षेत्र में 5,000 से अधिक लोग लापता हैं, जिनमें नेपाल में 4,886 और तिब्बत में 519 लोग शामिल हैं। लापता लोगों की इस सूची में नेपाल में 583 और तिब्बत में 261 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है।
राष्ट्रीय शोक और सरकार द्वारा उठाए गए कदम
नेपाल सरकार ने 7 सितंबर को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के पीड़ितों की याद में राष्ट्रीय शोक घोषित किया। यह आपदा 26 अगस्त से शुरू हुई थी। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस घटना को एक अभूतपूर्व आपदा करार दिया है। इसके बाद कैबिनेट ने प्रभावित परिवारों के लिए मुफ्त चिकित्सा उपचार और वित्तीय सहायता देने की मंजूरी दे दी है। राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल को मैदान में उतार दिया है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मदद भी मिलने लगी है जिसमें कतर फंड फॉर डेवलपमेंट की ओर से आपातकालीन आपूर्ति और कतरी इंटरनेशनल सर्च एंड रेस्क्यू ग्रुप की तैनाती शामिल है।
भारी आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य का संकट
4 सितंबर तक के नुकसान के अनुमान के अनुसार, यह आंकड़ा 387.54 अरब रुपये यानी 2.57 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा का है। इस आपदा से लगभग 16 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। घरों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं समेत बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। बचाव दल अभी भी अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक सुरंग में फंसे 100 से अधिक लोगों की तलाश में जुटे हैं। इस विनाशकारी घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र और वर्ल्ड विजन जैसे मानवीय संगठनों ने भीड़भाड़ वाले आश्रयों और खराब स्वच्छता स्थितियों के कारण संभावित बीमारियों के फैलने की चेतावनी दी है। इस आपदा से जुड़ी आधिकारिक जानकारी और अधिक विवरण के लिए आप WAM की रिपोर्ट देख सकते हैं।