नेपाल और तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ का तांडव, करीब 700 लोगों की मौत और 3 हजार लोग लापता.

Sushma Kumari30 August 20263 min read13 viewsWorld
नेपाल और तिब्बत सीमा पर भीषण बाढ़ का तांडव, करीब 700 लोगों की मौत और 3 हजार लोग लापता.

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर ग्लेशियर फटने की वजह से आई भयानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। इस विनाशकारी आपदा में अब तक लगभग 700 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और करीब 3 हजार लोग लापता बताए जा रहे हैं। रविवार, 30 अगस्त 2026 तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक अकेले नेपाल में 675 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में 7 लोगों की मौत हुई है। लापता होने वाले लोगों की संख्या में नेपाल से 2,426 और तिब्बत से 554 लोग शामिल हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।

युद्धस्तर पर चल रहा है बचाव अभियान

प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीमें फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। नेपाली सेना की टीमें विशेष ड्रिलिंग उपकरणों की मदद से जलविद्युत सुरंगों में फंसे 100 से ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। इसी कड़ी में शनिवार को त्रिशूल 3ए हाइड्रोइलेक्ट्रिक साइट पर एक सफल पाइप इंसर्शन किया गया। राहत और बचाव कार्य में पड़ोसी देशों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। भारत की तरफ से एक 11 सदस्यीय विशेष टीम और चीन की तरफ से एक नौ सदस्यीय सुरंग बचाव दल को मैदान में उतारा गया है। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इस आपदा में 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि 108 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। इसके अलावा 598 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल सीमा पार कर चुके हैं और भारतीय मूल के 128 लोग ऐसे हैं जिनसे अभी तक कोई संपर्क नहीं हो पाया है।

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नदियों का बढ़ता जलस्तर और कड़े प्रशासनिक निर्देश

रविवार की सुबह नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने भोटेकोशी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और उनके चीनी समकक्ष वांग यी के बीच हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने पर सहमति बनी है। इसके तहत बीजिंग द्वारा सैटेलाइट तस्वीरें और ऊपरी हिस्सों में बनी बैरियर झीलों को लेकर लगातार चेतावनियां दी जा रही हैं। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने अनुमान जताया है कि इस भीषण आपदा के बाद देश में पुनर्निर्माण का खर्च अरबों डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय मदद और जलवायु परिवर्तन की चेतावनी

इस संकट की घड़ी में दुनिया भर के देश नेपाल और तिब्बत की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अमेरिका ने मानवतावादी सहायता के रूप में 3.6 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की है। इसके अलावा ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, कनाडा और चीन ने भी मदद के हाथ बढ़ाए हैं। भारत सरकार की तरफ से चिकित्सा सहायता, जरूरी सामान और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम भेजी गई है। इस बीच ऐसी खबरें भी सामने आई हैं कि चीनी अधिकारियों ने तिब्बत क्षेत्र में बाढ़ से जुड़े वीडियो के प्रसार को सीमित कर दिया है और विदेशी पत्रकारों के वहां जाने पर रोक लगा दी है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टिल ने इस आपदा को हिमालयी क्षेत्र के लिए ग्लोबल वार्मिंग से पैदा होने वाले गंभीर खतरे का स्पष्ट संकेत बताया है। इस पूरी स्थिति की आधिकारिक जानकारी नेपाल विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी साझा की गई है।

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