नेपाल और तिब्बत सीमा पर बर्फानी तूफान और बाढ़ से भारी तबाही, 680 से ज्यादा लोगों की मौत और 3000 लोग लापता

Aanya30 August 20263 min read24 viewsWorld
नेपाल और तिब्बत सीमा पर बर्फानी तूफान और बाढ़ से भारी तबाही, 680 से ज्यादा लोगों की मौत और 3000 लोग लापता

हिमालया क्षेत्र में लांगटांग लिरुंग के पास एक ग्लेशियर के टूटने से नेपाल और तिब्बत सीमा पर भारी तबाही मच गई है। 26 अगस्त 2026 को आए इस बर्फीले तूफान, भूस्खलन और 5.2 तीव्रता के भूकंप के झटके ने मिलकर बड़े पैमाने पर मानवीय संकट पैदा कर दिया है। इस आपदा में अब तक 682 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 3,000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इस भयानक हादसे ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ वहां फंसे विदेशी नागरिकों और उनके परिवारों की मुश्किलें बहुत बढ़ा दी हैं, जिससे पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है।

सरकारी आंकड़े और लापता लोगों की जानकारी

नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के मुताबिक, 29 अगस्त 2026 तक अकेले नेपाल में मरने वालों की संख्या 675 तक पहुंच चुकी है और 2,426 लोग लापता हैं। नेपाल में लापता होने वालों में कुल 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें 288 भारतीय, 90 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 51 मलेशियाई, 35 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और लगभग 100 चीनी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के अधिकारियों ने 7 लोगों की मौत और 554 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है। बचाव टीमों ने अब तक 1,500 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है, लेकिन गहरी और दलदली कीचड़ के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान और आर्थिक मार

इस आपदा की वजह से इलाके की बुनियादी संरचना पूरी तरह तहस-नहस हो गई है। व्यापार और पर्यटन का मुख्य केंद्र माना जाने वाला ग्योंग पोर्ट कॉम्प्लेक्स पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। इसके अलावा, लगभग 14 हाइड्रोपावर और सोलर प्रोजेक्ट इस आपदा की चपेट में आ गए हैं, जिससे 748 मेगावाट बिजली का उत्पादन ठप हो गया है। शुरुआती आर्थिक अनुमानों के अनुसार इस पूरी तबाही के बाद दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने में लगभग 5 अरब डॉलर यानी $5 billion का खर्च आ सकता है।

प्रशासन की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय मदद

भूस्खलन के मलबे की वजह से नदियों का पानी रुक गया है जिससे कृत्रिम झीलें बन गई हैं। इन झीलों के टूटने का खतरा निचले इलाकों पर मंडरा रहा है, इसलिए दोनों देशों के अधिकारी पूरी तरह सतर्क हैं। नेपाल के आपदा प्रबंधन विभाग ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने का आदेश दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ग्लेशियर झीलों की निगरानी बढ़ाने को कहा है और प्रधानमंत्री ली कीआंग ने 27 अगस्त 2026 को प्रभावित ग्योंग इलाके का दौरा किया। भारत सरकार ने 29 अगस्त 2026 को अपनी चौथी उड़ान के जरिए 11 टन राहत सामग्री भेजी है, जिसमें सुरंग तकनीकी दल और डीएनए जांच के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि तकनीकी कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद ली जा रही है, लेकिन खोज और बचाव अभियानों के लिए बाहरी मदद की कोई आवश्यकता नहीं है। साथ ही, नेपाल के विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख ने इस बड़ी त्रासदी का हवाला देते हुए हिमालयी क्षेत्र पर मंडरा रहे ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को रेखांकित किया है और तुरंत वैश्विक स्तर पर कदम उठाने की अपील की है।

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