Nepal और Tibet में बाढ़ का कहर, 7400 से ज्यादा लोगों की मौत और लापता.

Praggya Singh sabal19 September 20262 min read15 viewsWorld
Nepal और Tibet में बाढ़ का कहर, 7400 से ज्यादा लोगों की मौत और लापता.

नेपाल और तिब्बत में अगस्त महीने में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 7,400 से ज्यादा लोगों की जान चली गई है या फिर वे लापता बताए जा रहे हैं। 19 सितंबर 2026 तक सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 1,400 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और कम से कम 6,000 लोग अभी भी लापता हैं। इस बड़ी तबाही की मुख्य वजह नेपाल-चीन बॉर्डर के पास 26 अगस्त 2026 को हुआ भारी बर्फ और चट्टानों का खिसकना यानी एवलेंच था। इस भयानक हादसे की वजह से इलाके में बने 12 हाइड्रोपावर प्लांट पूरी तरह तबाह हो गए और सड़कों, पुलों तथा रिहायशी घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.

आपदा से निपटने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम की मांग

हिमालयी देशों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अब एक्सपर्ट्स ने साझा अर्ली वार्निंग सिस्टम यानी शुरुआती चेतावनी प्रणाली को जल्द से जल्द लागू करने की मांग उठाई है। मौजूदा समय में जो चेतावनी तंत्र काम कर रहे हैं, वे ज्यादातर बारिश या नदियों के जलस्तर पर ही ध्यान देते हैं। इन पुरानी प्रणालियों में ऊंचाई वाले इलाकों में अचानक होने वाली बर्फ और चट्टान गिरने की घटनाओं का पहले से पता नहीं चल पाता है, जिससे आम जनता को संभलने का मौका तक नहीं मिलता है। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के आपदा जोखिम न्यूनीकरण विशेषज्ञ Saswata Sanyal ने चेतावनी देते हुए बताया कि सामान्य से कम बारिश होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बाढ़ का खतरा कम है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर होने वाले बादल फटने की घटनाएं अभी भी खतरनाक और विनाशकारी बाढ़ का रूप ले सकती हैं.

राहत और बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की मदद

नेपाल और चीन के बीच ग्लेशियर झीलों, भूस्खलन और बाढ़ को लेकर रियल-टाइम डेटा साझा करने पर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक समझौता साइन नहीं हुआ है। इसके अलावा, नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र की एक पहल के तहत 2027 तक सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'Early Warnings for All' (EW4All) रोडमैप तैयार कर लिया है, लेकिन इस योजना को जमीन पर उतरने का अभी भी इंतजार है। प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं राहत और बचाव कार्यों में लगातार जुटी हुई हैं ताकि पीड़ित लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा सके.

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