नेपाल और तिब्बत में बड़ा हादसा, ग्लेशियर फटने से आई भीषण बाढ़ में 273 लोगों की मौत और 1000 से ज्यादा लापता.

नेपाल और तिब्बत के पहाड़ी इलाकों में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को एक बहुत बड़ी प्राकृतिक आपदा आई। बर्फ और चट्टान खिसकने यानी ग्लेशियर के टूटने से वहां अचानक भीषण बाढ़ आ गई, जिससे चारों तरफ तबाही मच गई। इस भयंकर हादसे में अब तक कम से कम 273 लोगों की जान जा चुकी है और 1,000 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, यह हादसा 5.2 तीव्रता के हिमस्खलन की वजह से हुआ। वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से ऊंचे पहाड़ों की मिट्टी और बर्फ कमजोर हो रही है, जिसके कारण इस तरह की खतरनाक घटनाएं बार-बार सामने आ रही हैं। जानकारी के मुताबिक, पिछले 14 महीनों में लेहेंडे खोला नदी के इलाके में इस तरह की आपदा दूसरी बार आई है।
नेपाल और तिब्बत में भारी नुकसान
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण ने इस हादसे में 165 लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि कुल मिलाकर अधिकारियों ने वहां 270 शव बरामद कर लिए हैं। नेपाल की एजेंसी के अनुसार, इस आपदा में कुल 826 लोग गायब हैं, जिनमें 500 से 800 विदेशी नागरिक शामिल हैं। लापता होने वाले विदेशियों में 100 से 300 भारतीय, 65 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश, 25 कनाडाई नागरिक के अलावा मलेशिया, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, पुर्तगाल और दक्षिण अफ्रीका के लोग भी शामिल हैं। सीमा के दूसरी तरफ तिब्बत में सरकारी मीडिया के हवाले से 3 लोगों की मौत और 260 विदेशी नागरिकों समेत कुल 558 लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है।
बह गई जरूरी इमारतें और रास्ते
पहाड़ों से पानी, कीचड़ और मलबे का करीब 10 मीटर ऊंचा सैलाब नीचे की तरफ आया, जिसने रास्ते में आने वाली हर जरूरी चीज को तबाह कर दिया। इस आपदा में रसुवागढी सीमा शुल्क कार्यालय पूरी तरह बर्बाद हो गया। इसके अलावा करीब 40 किलोमीटर लंबी सड़कें, कई पुल, जलविद्युत परियोजनाएं और सरकारी इमारतें मिट्टी में मिल गईं। बाढ़ का पानी नदी के स्तर से करीब 80 मीटर ऊपर तक की बस्तियों में जा पहुंचा था। तिब्बत के जिरोंग पोर्ट इलाके में फोन और बिजली की लाइनें पूरी तरह कट गईं, वहीं नेपाल की राजधानी काठमांडू में भी एक दिन तक बिजली गुल रही।
रेस्क्यू ऑपरेशन और राहत कार्य जारी
प्रभावित इलाकों में नेपाल की सेना और पुलिस लगातार खोज और बचाव का काम कर रही है। गुरुवार, 27 अगस्त को सुरक्षा बलों ने 125 लोगों को सुरक्षित बचाया, जिनमें 20 विदेशी लोग भी शामिल थे। इनमें से 8 लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से तुरंत काठमांडू पहुंचाया गया। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने नुवाकोट जिले का दौरा किया और वहां हुए नुकसान का जायजा लिया। चीन के अधिकारियों ने भी जिरोंग इलाके में नदी का पानी रुकने से एक नई झील बनने का खतरा जताया है और लोगों को चेतावनी दी है। दुनिया भर के देश और संगठन इस मुश्किल समय में मदद के लिए आगे आ रहे हैं। अमेरिका ने 500,000 डॉलर की मदद और एक आपदा राहत सलाहकार देने की घोषणा की है। भारत सरकार की तरफ से खाने-पीने का सामान और तंबू समेत 47 टन मानवीय सहायता पहुंचाई जा चुकी है। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की टीमें, रेड क्रॉस और नेपाल रेड क्रॉस सोसाइटी भी राहत सामग्री बांटने में जुटी हुई हैं। नेपाल के भारत स्थित दूतावास ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए इमरजेंसी नंबर भी जारी किए हैं।