Nepal Glacier Collapse: नेपाल और तिब्बत में बर्फीले तूफान और बाढ़ से भारी तबाही, सैकड़ों लोग लापता और बचाव कार्य जारी.

Sushma Kumari27 August 20263 min read39 viewsWorld
Nepal Glacier Collapse: नेपाल और तिब्बत में बर्फीले तूफान और बाढ़ से भारी तबाही, सैकड़ों लोग लापता और बचाव कार्य जारी.

नेपाल और पड़ोसी देश तिब्बत में Wednesday, August 26, 2026 को हुए एक भीषण हिमनद यानी ग्लेशियर ढहने की घटना के बाद से कोहराम मचा हुआ है। इस भयानक आपदा की वजह से अचानक भयंकर बाढ़ और कीचड़ का सैलाब आ गया, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। शुरुआत में इस घटना के पीछे किसी भूकंप की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन बाद में U.S. Geological Survey (USGS) और नेपाल के National Disaster Risk Reduction and Management Authority ने यह साफ कर दिया कि यह बर्फीले तूफान, चट्टान खिसकने और ग्लेशियर टूटने की वजह से हुआ था। इस भयंकर घटना के बाद से राहत और बचाव का काम बहुत तेजी से चल रहा है, लेकिन अभी भी सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं और उनके परिवारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।

नेपाल और तिब्बत में जान-माल का भारी नुकसान

इस आपदा में मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है और नेपाल पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक Wednesday की रात और Thursday की सुबह तक कुल 157 से 162 शव बरामद किए जा चुके हैं। नेपाल के पर्यटन मंत्रालय का अनुमान है कि इस इलाके में घूम रहे कुल 403 से 468 पर्यटक अभी भी लापता हैं, जिनमें से 341 से 439 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इन लापता विदेशी नागरिकों में 142 भारतीय, 47 अमेरिकी, 34 ऑस्ट्रेलियाई, 33 ब्रिटिश और 24 कनाडाई नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा मलेशिया, यूक्रेन, जर्मनी, इजराइल, नीदरलैंड, पुर्तगाल, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और जापान के लोग भी लापता लोगों की सूची में हैं। वहीं दूसरी तरफ तिब्बत के ग्यािरोंग काउंटी में चीनी सरकारी मीडिया ने 3 लोगों की मौत और 265 से 558 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है।

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बुनियादी ढांचे और बिजली उत्पादन को बड़ा झटका

नेपाल के मध्य जिलों जैसे कि रसुवा, धाडिंग और नुवाकोट में बुनियादी ढांचों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा है। यहाँ प्रसिद्ध फ्रेंडशिप ब्रिज यानी मैत्री पुल पूरी तरह से नष्ट हो गया है और सड़कों का नेटवर्क भी बुरी तरह टूट चुका है। नेपाल बिजली प्राधिकरण ने बताया कि कम से कम छह प्रमुख जलविद्युत और ट्रांसमिशन सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिसकी वजह से देश की कुल बिजली उत्पादन क्षमता में लगभग 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। इस तबाही के बाद से प्रभावित इलाकों में बिजली की आपूर्ति बहाल करने और टूटे रास्तों को ठीक करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन भारी मलबे की वजह से टीमों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मदद का हाथ बढ़ा

इस संकट की घड़ी में प्रभावित क्षेत्रों की मदद के लिए दुनिया भर के देश और संगठन आगे आ रहे हैं। भारत सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दवाइयों और सोलर लैंप जैसी जरूरी चीजों सहित 10 टन मानवीय सहायता सामग्री भेजी है। वहीं अमेरिका ने कैथोलिक रिलीफ सर्विसेज के जरिए 500,000 डॉलर की आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है। इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड Crescent सोसाइटीज यानी IFRC ने 10 लाख स्विस फ़्रैंक जारी किए हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने भी आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति उपलब्ध कराई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने आधिकारिक तौर पर समर्थन की पेशकश की है और यूरोपीय संघ ने भी हरसंभव मदद करने की अपनी इच्छा जताई है ताकि राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके।

जीवित बचे लोगों की डरावनी कहानियां और प्रशासन की चेतावनी

इस कुदरती कहर के बीच कुछ लोग अपनी जान बचाने में कामयाब रहे जिन्होंने अपनी आपबीती सुनाई। एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि कैसे उसकी आंखों के सामने उसकी पत्नी मलबे में दब गई, जबकि दूसरे व्यक्ति ने एक पेड़ को कसकर पकड़कर अपनी जान बचाई। प्रशासन ने त्रिशूल नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चेतावनी जारी की है क्योंकि ऊपर की तरफ जमा हुए मलबे के कारण अचानक फिर से बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। भारत के गृह मंत्रालय द्वारा भी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, खासकर भारत-नेपाल सीमा के पास बढ़ते पानी के स्तर को लेकर सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि विशेषज्ञ इस आपदा का मुख्य कारण हिमालयी क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे जलवायु को मान रहे हैं।

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