नेपाल और तिब्बत में बर्फीले तूफान और बाढ़ का कहर, मरने वालों की संख्या हुई 750

नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में बुधवार, 26 अगस्त 2026 को आए एक भयानक ग्लेशियर बाढ़ और बर्फीले तूफान ने भारी तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक कम से कम 750 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। यह आपदा लांगटांग लिरुंग और त्संग्बु री चोटियों के पास एक ग्लेशियर के आंशिक रूप से टूटने से शुरू हुई थी, जिसकी वजह से रिक्टर स्केल पर 5.2 तीव्रता का भूकंपीय झटका भी महसूस किया गया। इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) के अनुसार, पानी के भारी दबाव के कारण त्रिशूली नदी का जलस्तर मात्र 30 मिनट के भीतर 9 मीटर तक बढ़ गया था, जिसके बारे में अधिक जानकारी WMO की आधिकारिक रिपोर्ट में दी गई है।
राहत और बचाव कार्य में आ रही है भारी रुकावट
अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 30 अगस्त 2026 तक अकेले नेपाल में मरने वालों की संख्या 734 पहुंच गई है, जबकि तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है। नेपाल में अभी भी 2,498 लोग लापता हैं, जिनमें हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट से जुड़े 933 लोग और 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। वहीं तिब्बत में 546 लोग लापता हैं, जिनमें 261 विदेशी और कम से कम 18 अमेरिकी नागरिक शामिल हैं। रसुवा जिले स्थित त्रिशूली 3ए हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे 100 से ज्यादा लोगों को बचाने के लिए बचाव दल लगातार कोशिश कर रहा है। चीन ने इस बचाव कार्य में मदद के लिए अपने विशेष सुरंग विशेषज्ञों को भी तैनात किया है। इसके अलावा, त्रिशूली 3बी और रसुवागढी हाइड्रो प्लांट को भी इस आपदा में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
सरकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही मदद
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) द्वारा राहत कार्यों की लगातार निगरानी की जा रही है, हालांकि खराब मौसम, लगातार हो रही भारी बारिश और आंधी-तूफानों की वजह से बचाव अभियानों में बड़ी बाधा आ रही है। शुरुआत में नेपाल सरकार ने विदेशी खोज और बचाव टीमों की मदद लेने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में संयुक्त राज्य अमेरिका ने इस संकट से निपटने के लिए 3.6 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने का ऐलान किया है। देश के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने अनुमान जताया है कि नेपाल को इस भारी तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए कुल 4 अरब से 5 अरब डॉलर की आवश्यकता होगी।
जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल और संयुक्त राष्ट्र के जलवायु अधिकारियों ने इस बड़ी त्रासदी को जलवायु परिवर्तन का एक गंभीर और खतरनाक परिणाम बताया है। उन्होंने कहा है कि वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में नेपाल का योगदान बहुत कम होने के बावजूद हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील बनता जा रहा है। विश्व मौसम संगठन (WMO) इस क्षेत्र के मौसम पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि भुटेकोशी नदी के पास जलस्तर बढ़ने की चेतावनियों के बीच बचाव और खोज का यह काम अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जारी है, जिसके बारे में विस्तार से WMO की वेबसाइट पर बताया गया है।