नेपाल में बड़ा हादसा, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के टनल से 6 शव बरामद और सैकड़ों लोग अभी भी लापता.

नेपाल की प्राकृतिक आपदाओं ने एक बार फिर से भारी तबाही मचाई है, जहां हाल ही में भोटेकोसी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि ऊपरी त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना के टनल से बचाव दल ने छह शवों को सफलतापूर्वक बरामद कर लिया है। इस भयंकर आपदा के बाद से परियोजना से जुड़े सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए सेना और राहत दल लगातार मशक्कत कर रहे हैं। प्रशासन और संबंधित अधिकारियों द्वारा लगातार खोज अभियान चलाया जा रहा है ताकि लापता लोगों का जल्द से जल्द कुछ पता लगाया जा सके।
नेपाली सेना और संयुक्त बचाव दल का कड़ा अभियान
नेपाली सेना से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना 26 अगस्त को भोटेकोसी नदी में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरू हुई थी। परियोजना से संपर्कविहीन हुए लोगों की तलाश के लिए संयुक्त बचाव दल ने विशेष रूप से ऑडिट-3 टनल के अंदर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान बचाव कर्मियों को टनल के अंदर कंक्रीट ढलाई के लिए तैयार की गई लोहे की छड़ों की जाली के अंदर छह शव बुरी तरह फैसे हुए मिले। स्थिति इतनी गंभीर थी कि शवों को बाहर निकालने के लिए ग्राइंडर, गैस कटर और आधुनिक रोटरी रेस्क्यू उपकरणों का सहारा लेना पड़ा। सेना के मुताबिक टनल के अंदर कीचड़ से ढकी हुई कुछ अन्य आकृतियां भी शव जैसी ही दिखाई दे रही हैं, जिसके बाद उस खास इलाके में सुरक्षा बलों का तलाशी अभियान अभी भी पूरी मुस्तैदी के साथ जारी है।
लापता लोगों की संख्या और परियोजना की वर्तमान स्थिति
अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित हुई है, जहां से बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा लोग संपर्कविहीन हुए हैं। सामने आए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना से जुड़े 492 लोग अब भी पूरी तरह से लापता हैं, जबकि राहत की बात यह है कि 936 लोग सुरक्षित रूप से संपर्क में आ चुके हैं। जब यह भयानक बाढ़ आई थी, उस समय इस जलविद्युत परियोजना में कुल 1,433 कर्मचारी और श्रमिक पूरी ईमानदारी से अपने काम में जुटे हुए थे। गौरतलब है कि यह महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजना दक्षिण कोरियाई निवेश के सहयोग से निर्माणाधीन है, जिस पर इस प्राकृतिक आपदा की वजह से बहुत बड़ा असर पड़ा है। इस पूरी घटना की अधिक जानकारी के लिए आप हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट देख सकते हैं।