नेपाल बाढ़ अपडेट: त्रिशूली और नारायणी नदी से मिले 321 शव, 280 के डीएनए और फॉरेंसिक जांच शुरू

नेपाल में हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है, जहां नदियां अपने पीछे भारी तबाही के निशान छोड़ गई हैं। नेपाल की त्रिशूली और नारायणी नदी के तटीय इलाकों से सुरक्षा बलों ने कुल 321 शव बरामद किए हैं, जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है। इन सभी बरामद शवों को सुरक्षित रखने और उनकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है, ताकि समय रहते लापता लोगों के परिवारों को उनके बारे में जानकारी मिल सके।
अस्पताल और फॉरेंसिक टीम की तैनाती
भरतपुर अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. रामप्रसाद सापकोटा ने जानकारी दी कि 26 अगस्त की रात से ही सुरक्षाकर्मियों ने त्रिशूली नदी से शवों को निकालकर अस्पताल पहुंचाना शुरू कर दिया था। इसके अगले दिन यानी 27 अगस्त की सुबह से ही फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक विशेष टीम को मैदान में उतार दिया गया। यह टीम लगातार शवों की पहचान के लिए जरूरी फॉरेंसिक जांच कर रही है और साथ ही डीएनए सहित अन्य जैविक नमूने भी सुरक्षित रख रही है ताकि भविष्य में पहचान आसान हो सके।
चितवन के देवघाट में सुरक्षित रखे गए शव
जिला पुलिस कार्यालय चितवन के प्रमुख पुलिस अधीक्षक रामेश्वर पौडेल ने बताया कि अब तक दोनों नदियों से कुल 321 शव निकाले जा चुके हैं। इनमें से अब तक 12 शवों की पहचान पूरी हो चुकी है, जिन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। इन सभी शवों को अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करते हुए चितवन के देवघाट स्थित प्रबंधन स्थल पर बेहद सुरक्षित तरीके से रखा गया है ताकि किसी भी तरह की दिक्कत न आए।
बरामद शवों का पूरा आंकड़ा
पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, बरामद किए गए कुल शवों में 66 महिलाएं, 116 पुरुष, 7 बालक, 6 बालिकाएं शामिल हैं। इसके अलावा 126 शव ऐसे भी हैं जिनकी स्थिति या पहचान अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन ने बताया कि आपदा के बाद के दिनों में यानी भाद्र 13 को 96 शवों, भाद्र 14 को 103 शवों और भाद्र 15 को 81 शवों का प्रबंधन किया गया था।
नदियों के किनारे तलाश अभी भी जारी
पुलिस अधीक्षक रामेश्वर पौडेल ने यह भी स्पष्ट किया कि नदी के किनारों पर और पानी के भीतर शवों की तलाश का काम अभी भी रोजाना चल रहा है। जैसे ही नदी से कोई नया शव मिलता है, उसे तुरंत भरतपुर अस्पताल लाया जाता है। वहां डॉक्टर उसकी फॉरेंसिक जांच करते हैं और डीएनए का नमूना लेते हैं, जिसके बाद उसे देवघाट के सुरक्षित प्रबंधन स्थल पर भेज दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया पर सरकार और स्थानीय प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।