नेपाल में त्रासदी के नौ दिन बाद टनल से दो मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले गए, मौत का आंकड़ा 1300 के पार.

Praggya Singh sabal5 September 20263 min read27 viewsWorld
नेपाल में त्रासदी के नौ दिन बाद टनल से दो मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले गए, मौत का आंकड़ा 1300 के पार.

नेपाल और चीन सीमा पर हुए भयानक ग्लेशियर टूटने की घटना के नौ दिन बाद बचाव दल ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। त्रिशूल 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो नेपाली मजदूरों को शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इन दोनों मजदूरों के नाम संजय शाह और कबीर महर्षि हैं, जो हादसे के बाद से सुरंग के अंदर फंसे हुए थे। इन दोनों को तुरंत इलाज के लिए काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां इनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। स्थानीय अधिकारियों की मदद कर रहे ऑस्ट्रेलियाई इंजीनियर और भूविज्ञानी अर्नोल्ड डिक्स ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन को इक्कीसवीं सदी के सबसे बड़े अभियानों में से एक बताया है। नेपाल के संचार मंत्री विक्रम तिमिल्सिना ने जानकारी दी कि राहत और बचाव दलों को अभी भी सुरंग के अंदर से इंसानी आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिससे और लोगों के जिंदा मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। नेपाली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बस्नेत के नेतृत्व में प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान लगातार जारी है।

मानवीय संकट और भारी तबाही

इस प्राकृतिक आपदा की वजह से इंसानी जिंदगी और बुनियादी ढांचे को बहुत भारी नुकसान पहुंचा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 5 सितंबर 2026 तक इस आपदा में 1,294 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में मरने वालों का आंकड़ा 1,344 तक पहुंच गया है। इसके अलावा लगभग 5,053 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। सीमा पार के कुल आंकड़ों को मिला दिया जाए तो मरने वालों की संख्या 1,325 और लापता लोगों का आंकड़ा 5,584 हो गया है। इस आपदा की वजह से देश में भयंकर बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं, जिससे हजारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए और उन्हें अस्थाई राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है। बाढ़ और बारिश के कारण सड़क और पुलों का ढांचा बुरी तरह टूट गया है, जिसमें 41 पुल पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और कई हाईवे बंद होने की वजह से राहत सामग्री पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संपत्ति और बुनियादी ढांचे को हुए कुल आर्थिक नुकसान का आकलन लगभग 386.16 अरब नेपाली रुपये यानी करीब 2.56 अरब अमेरिकी डॉलर लगाया गया है।

अंतरराष्ट्रीय मदद और पुनर्निर्माण के प्रयास

इस गंभीर संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार ने दुनिया भर के देशों से बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय मदद की गुहार लगाई है। देश के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने इस बात पर जोर दिया है कि देश के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 4 अरब से 5 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम राशि की जरूरत होगी, जिसके लिए स्थापित वैश्विक जलवायु-पोषण तंत्र के जरिए सहायता दी जानी चाहिए। इस दिशा में कदम उठाते हुए 4 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र और उसके मानवीय सहयोगियों ने मिलकर 49.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन अपील जारी की है। संकट की इस घड़ी में कई देश नेपाल की मदद के लिए आगे आ रहे हैं। भारत सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए मेडिकल किट, टेंट और कंबल जैसी जरूरी राहत सामग्री भेजी है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने अपने विशेष आपदा सहायता दलों को मौके पर तैनात किया है। इसके अलावा अमेरिका के 27 सांसदों ने देश के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को एक औपचारिक पत्र लिखकर अमेरिकी मदद के दायरे को बढ़ाने की मांग की है ताकि नेपाल को ऊंचे पहाड़ों पर खोजबीन करने वाले विशेष संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें। इस आपदा से जुड़ी विस्तृत जानकारी और राहत कार्यों के अपडेट्स के लिए ReliefWeb रिपोर्ट पर पूरी नजर रखी जा रही है।

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