नेपाल में अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना हादसा, 439 लोग अब भी लापता और 877 सुरक्षित बचाए गए

Nura Basta21 September 20264 min read7 viewsWorld
नेपाल में अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना हादसा, 439 लोग अब भी लापता और 877 सुरक्षित बचाए गए

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित 216 मेगावाट की निर्माणाधीन अपर त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं। इस बड़ी आपदा के बाद से परियोजना स्थल पर काम करने वाले कुल 439 लोग अब भी संपर्कविहीन बने हुए हैं और उनकी तलाश का काम लगातार तेजी के साथ जारी है। इस हादसे के बाद से प्रशासन और बचाव टीमों की सांसे अटकी हुई हैं क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर लोगों के लापता होने से उनके परिवार वालों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। नेपाल के इस इलाके में आई तबाही ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है और राहत तथा बचाव कार्य पिछले कई दिनों से बिना रुके लगातार चलाया जा रहा है ताकि किसी भी तरह फंसे हुए लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके।

नेपाल वाटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी ने दी आधिकारिक जानकारी

परियोजना की प्रवर्द्धक कंपनी नेपाल वाटर एंड एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से दी गई ताजा जानकारी के मुताबिक, आपदा के बाद से अब तक कुल 877 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इसके अलावा 78 लोग ऐसे हैं जो किसी तरह संपर्क में आ चुके हैं और सुरक्षित हैं, जबकि दुर्भाग्यवश अब तक 39 लोगों के शव भी बरामद किए जा चुके हैं। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि जब यह भयंकर बाढ़ आई थी, उस समय इस परियोजना स्थल पर नेपाली नागरिकों के साथ-साथ कोरियाई, चीनी, भारतीय और अन्य कई देशों के नागरिक समेत कुल करीब 1,433 लोग काम कर रहे थे। इतनी बड़ी संख्या में कामगारों की मौजूदगी के कारण इस आपदा का असर बहुत व्यापक स्तर पर देखने को मिला है और विभिन्न देशों के मजदूरों के फंसे होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना की लगातार निगरानी की जा रही है।

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कौन-कौन सी कंपनियां थीं इस बड़े प्रोजेक्ट में शामिल

इस निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना के काम से कई बड़ी कंपनियां जुड़ी हुई थीं जिनमें प्रवर्द्धक कंपनी के अलावा परामर्शदाता के रूप में ट्रैक्टावेल और जेड कंसल्ट शामिल थीं। इसके अलावा इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण का मुख्य काम कोरियाई कंपनी डूसान के जिम्मे था, जिसके सिविल कार्य के सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में पावर चाइना काम कर रही थी। वहीं इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य से जुड़ी जानी-मानी कंपनी एंड्रिज हाइड्रो और अन्य कई छोटी-बड़ी फर्मों के कर्मचारी भी उस दौरान वहां अपनी सेवाएं दे रहे थे। बाढ़ आने के तुरंत बाद से ही इन सभी कंपनियों के कर्मचारी और अधिकारी लापता लोगों की सुध लेने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार काम कर रहे हैं और हरसंभव मदद मुहैया कराने की कोशिश में जुटे हुए हैं ताकि फंसे हुए लोगों को जल्द से जल्द ढूंढा जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों और बचाव दलों का संयुक्त अभियान

कंपनी ने यह भी जानकारी दी है कि कार्यरत सभी नेपाली और विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। इस काम को अंजाम देने के लिए विभिन्न सरकारी निकायों, सुरक्षा एजेंसियों, तकनीकी विशेषज्ञों और बचाव दलों के बीच लगातार तालमेल बिठाया जा रहा है। परियोजना के बांध स्थल से मुख्य सुरंग की ओर जाने वाले रास्ते में बाढ़ की वजह से एक भारी-भरकम ट्रक के पलट जाने की भी बात सामने आई है जो तबाही के मंजर को साफ बयां करती है। इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुई इस जगह पर शुरुआत से ही नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल, नेपाल पुलिस, कोरियाई विशेषज्ञों और खुद परियोजना की टीम की संयुक्त भागीदारी में लगातार खोजबीन की जा रही है। भूमिगत संरचनाओं के अंदर फंसे हो सकने वाले लोगों को बाहर निकालने के लिए दिन-रात एक किया जा रहा है और आसपास के पहाड़ी इलाकों, गांवों तथा अन्य संभावित जगहों पर भी सुरक्षा बल लगातार नजर बनाए हुए हैं।

बचाव कार्य में आ रही भौगोलिक और तकनीकी मुश्किलें

खोज अभियान को और ज्यादा असरदार बनाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित खोजी कुत्तों की टीम यानी डॉग स्क्वाड, पर्वतारोही बचाव दल और अन्य दक्ष कामगारों को मैदान में उतारा गया है। परियोजना की बड़ी-बड़ी सुरंगों, भूमिगत पावरहाउस और अन्य भौतिक निर्माणों में लोगों के फंसे होने की आशंका लगातार बनी हुई है, जिसके चलते वहां जमा मलबा और कीचड़ को हटाने का काम बहुत सावधानी से किया जा रहा है। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वहां की अत्यंत दुर्गम भौगोलिक स्थिति, बाढ़ से हुई भारी तबाही, घटनास्थल तक पहुंचने वाली सड़कों की खस्ता हालत, परिवहन के साधनों की भारी कमी, रहने के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव और सबसे बढ़कर दोबारा भूस्खलन होने का खतरा जैसी कई बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। इसके बावजूद सभी संयुक्त टीमें पूरी ताकत के साथ डटी हुई हैं और बचाव दलों को उनके काम में किसी तरह की कमी न आए, इसके लिए सभी जरूरी संसाधन तुरंत उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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