नेपाली कांग्रेस महाधिवेशन: राष्ट्रीय मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर सहयोग की अपील

Gautam Sahu5 October 20262 min read0 viewsWorld
नेपाली कांग्रेस महाधिवेशन: राष्ट्रीय मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष से ऊपर उठकर सहयोग की अपील

नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है, जहाँ देश के दिग्गज नेताओं ने यह माना है कि जब बात राष्ट्रहित की हो, तो राजनीतिक दलों के झंडे और विचारधाराएं गौण हो जाती हैं। काठमांडू में आयोजित नेपाली कांग्रेस के 15वें महाधिवेशन के उद्घाटन सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के शीर्ष नेताओं ने एक सुर में कहा कि लोकतंत्र, संविधान और आर्थिक सुधार जैसे गंभीर मुद्दों पर आपसी संवाद और सहयोग अब अनिवार्य हो गया है।

इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (रास्वपा) के सभापति रवि लामिछाने, नेपाली कांग्रेस के गगन थापा, माओवादी नेता पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचंड’ और एमाले महासचिव शंकर पोखरेल समेत कई प्रमुख हस्तियों ने शिरकत की। इन नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश की राष्ट्रीयता और लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने के लिए राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठना होगा।

नेताओं ने जताई लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की चिंता

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नेपाली कांग्रेस के सभापति गगन थापा ने लोकतंत्र और आम जनता के जीवन के बीच की दूरी को कम करने की बात कही। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक अधिकारों को आर्थिक विकास और बेहतर सेवाओं से नहीं जोड़ा गया, तो जनता का लोकतंत्र पर से भरोसा उठ सकता है। थापा ने कांग्रेस को पुरानी और नई पीढ़ी के बीच एक सेतु (पुल) के रूप में कार्य करने का आह्वान किया।

वहीं, रास्वपा के रवि लामिछाने ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राष्ट्र के सामने आने वाली चुनौतियों के समय पार्टी का अंतर मायने नहीं रखता। उन्होंने सरकार की स्थिरता पर बोलते हुए कहा कि यह सरकार जनमत से बनी है और इसे गिरने की बातें करने वालों को हकीकत का सामना करना होगा।

दूसरी ओर, माओवादी नेता प्रचंड ने कांग्रेस को एकजुट होने की सलाह दी और शांति समझौते के अधूरे कार्यों की याद दिलाई। उन्होंने आगाह किया कि यदि शांति समझौते की शर्तों को पूरा नहीं किया गया, तो देश एक बार फिर संघर्ष की स्थिति में जा सकता है। एमाले महासचिव शंकर पोखरेल ने पुराने संघर्षों को याद करते हुए कहा कि जिस तरह राणा शासन और पंचायती व्यवस्था के खिलाफ सबने मिलकर लड़ाई लड़ी थी, उसी तरह अब लोकतंत्र की रक्षा के लिए कांग्रेस और एमाले को फिर से हाथ मिलाना चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. बाबूराम भट्टराई ने देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक बदलाव तो हुए, लेकिन आर्थिक सुधार उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। उन्होंने सुझाव दिया कि अब राजनीतिक दलों के बीच इस बात की प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए कि कौन देश के विकास के लिए बेहतर दीर्घकालीन योजना लागू करता है। राप्रपा अध्यक्ष राजेंद्र लिंगदेन ने भी देश की वर्तमान दिशा पर सवाल उठाए और सोशल मीडिया के प्रभाव व शासन की कमियों की ओर ध्यान दिलाया।

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