Israel Elections: नेतन्याहू पर बढ़ा राजनीतिक दबाव, अक्टूबर 7 की जांच रोकने को लेकर खड़े हुए बड़े सवाल.

Nura Basta4 September 20262 min read35 viewsEnglish
Israel Elections: नेतन्याहू पर बढ़ा राजनीतिक दबाव, अक्टूबर 7 की जांच रोकने को लेकर खड़े हुए बड़े सवाल.

इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल बहुत ज्यादा गर्म हो गया है। देश में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमलों को लेकर प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। लोग और विपक्षी दल इस बात से नाराज हैं कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने से क्यों बच रही है। आलोचकों का साफ कहना है कि सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी सिर्फ एक दिखावा है ताकि असली कमियों को छुपाया जा सके।

चैनल 12 की रिपोर्ट से सामने आई नई बातें

हाल ही में Channel 12 की एक रिपोर्ट ने इस मामले में नया विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि हमले की शुरुआत सुबह 6:29 बजे होने के बावजूद प्रधानमंत्री अपने सीहरिया आवास से आईडीएफ के किरया सैन्य मुख्यालय पहुंचने में दो घंटे से ज्यादा का समय लगा गए। हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि वह अपने काफिले की तैयारी के बाद सुबह 7:30 बजे वहां से निकल गए थे। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने किरया पहुंचने से पहले सुरक्षा प्रमुखों से संपर्क नहीं किया था और उनकी पहली बैठक सुबह 9:55 बजे शुरू हुई थी। इस पर प्रधानमंत्री ने सफाई दी है कि वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने जानबूझकर उन्हें नहीं जगाया क्योंकि उन्हें डर था कि वे तुरंत कोई सैन्य आदेश दे देंगे जो हमास की ताकत के बारे में उनके आकलन के खिलाफ जाता।

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मानहानि के मुकदमे की धमकी और राजनीतिक बयानबाजी

इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच सारा नेतन्याहू के एक इंटरव्यू ने हालात को और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया है। उन्होंने Channel 14 पर एक इंटरव्यू के दौरान विपक्षी नेता Yair Golan पर यह आरोप लगाया कि उन्हें हमास के हमले की पहले से जानकारी थी। इस बयान के बाद योयर गोलन ने मानहानि के लिए सारा नेतन्याहू से 2.5 मिलियन शेकेल यानी लगभग 800,000 अमेरिकी डॉलर हर्जाना मांगने की बात कही है। जवाब में प्रधानमंत्री ने भी एक मिलियन शेकेल का काउंटर केस करने की धमकी दी है। पूर्व रक्षा मंत्री Avigdor Lieberman ने योयर गोलन का खुलकर समर्थन किया है और ऐसी बातें फैलाने वालों को मानसिक रूप से बीमार बताया है।

जनता के बीच फैलती साजिश की बातें और चुनावी असर

ताजा सर्वे बताते हैं कि लगभग 40 प्रतिशत आम जनता और सत्तारूढ़ गठबंधन के 56.7 प्रतिशत वोटर इन बातों पर यकीन करते हैं कि इजराइली अधिकारियों को इस हमले की पहले से खबर थी या उन्होंने इसमें मदद की थी। राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर आगामी चुनाव में Benjamin Netanyahu चुनाव हार जाते हैं, तो आने वाली नई सरकार सबसे पहले एक राष्ट्रीय जांच आयोग बनाएगी। इसका सीधा असर उनके चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों पर भी पड़ सकता है। इन सभी तनावों के बीच प्रधानमंत्री ने देशद्रोह के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और अपनी बात पर कायम हैं कि सुरक्षा नेतृत्व के स्तर पर एक बहुत बड़ी गलती हुई थी।

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