Al-Aqsa Mosque: इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अल-अक्सा के नीचे बनी सुरंगों का किया दौरा

पूर्वी यरुशलम के पुराने शहर और अल-अक्सा मस्जिद परिसर के नीचे बनी सुरंगों का इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और उनकी पत्नी Sara ने दौरा किया। यह घटना 20 सितंबर 2026 की है, जब यहूदी धर्म के योम Kippur अवकाश से पहले पश्चिमी दीवार पर 'Selichot' प्रार्थनाएं होनी थीं। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने उस जगह पर इसराइल के अकेले अधिकार का दावा किया और उस जगह को यहूदियों का पवित्र स्थान बताया। उन्होंने कहा कि हम इस समय सबसे पवित्र स्थान पर हैं और यहां हमारे सिवाय कोई और नहीं हो सकता है।
कड़ी सुरक्षा के बीच हुआ दौरा
प्रधानमंत्री के इस दौरे के समय पुराने शहर में इसराइली पुलिस और बॉर्डर गार्ड्स को बहुत भारी संख्या में तैनात किया गया था। उसी दिन यानी रविवार को लगभग 570 इसराइली settler सुरक्षा बलों के साथ अल-अक्सा मस्जिद के अंदर गए थे और वहां कुछ ऐसे धार्मिक अनुष्ठान किए जिन्हें स्थानीय लोगों ने भड़काऊ बताया। इस बात पर कई पक्षों की तरफ से तुरंत कड़ा विरोध जताया गया। हमास संगठन ने प्रधानमंत्री के वहां जाने और उनके बयानों को मस्जिद की पहचान पर हमला बताया और इसे भड़काऊ हरकत कहा। हमास का कहना है कि यह परिसर सिर्फ और सिर्फ मुसलमानों की जगह है।
फिलिस्तीनी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का विरोध
फिलिस्तीन के यरुशलम गवर्नर और यरुशलम इस्लामिक वक्फ एडमिनिस्ट्रेशन ने भी इस बात पर कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम उठाने का मकसद अल-अक्सा परिसर को समय और जगह के हिसाब से बांटना है। गवर्नर ने फिलिस्तीनी लोगों से अपील की है कि वे मस्जिद के पास इकट्ठा हों ताकि इन योजनाओं को सफल न होने दिया जाए। अल-अक्सा मस्जिद के उपदेशक Sheikh Akrama Sabri ने इन घटनाओं को यरुशलम की मौजूदा स्थिति को बदलने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया।
दूसरी तरफ दुनिया के दूसरे देशों की तरफ से भी इस पर तुरंत प्रतिक्रिया सामने आई। जॉर्डन के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे की कड़ी निंदा की और साफ किया कि पूर्वी यरुशलम एक कब्जा किया हुआ शहर है और इसराइल का इस पर कोई अधिकार नहीं है। इसी तरह फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने भी इन कामों को नरसंहार, लोगों को हटाने और जमीन पर कब्जा करने की एक बड़ी मुहिम का हिस्सा बताया। इस जगह को लेकर ऐतिहासिक और कानूनी विवाद बहुत पुराना है। इसराइल पश्चिमी दीवार को एक यहूदी पवित्र स्थल के तौर पर देखता है, जबकि वक्फ इसे इस्लामिक विरासत का अहम हिस्सा मानता है। इसराइली कानून के मुताबिक वहां होने वाली किसी भी खुदाई का काम इसराइल एंटीक्विटीज अथॉरिटी की देखरेख में होना चाहिए और इसके लिए पवित्र स्थानों की मंत्री समिति से मंजूरी मिलना जरूरी है। फिलिस्तीनी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पहले भी कई बार चेतावनी दी है कि इस तरह की खुदाई से अल-अक्सा मस्जिद की इमारत को खतरा पहुंच सकता है।