UN में नेतन्याहू का कड़ा बयान, कतर और तुर्की पर निशाना साधकर नरसंहार को बताया झूठ.

Sushma Kumari24 September 20263 min read9 viewsWorld
UN में नेतन्याहू का कड़ा बयान, कतर और तुर्की पर निशाना साधकर नरसंहार को बताया झूठ.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने भाषण के दौरान दुनिया भर के देशों को कड़ा संदेश दिया और कई देशों की नीतियों पर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर तीखे हमले के साथ की और इजराइल की सैन्य कार्रवाई का पूरी तरह से बचाव किया। नेतन्याहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर समय रहते इजराइल ने यह बड़ा कदम नहीं उठाया होता तो आज उन सभी का बचना बहुत मुश्किल हो जाता।

ईरान और हमास पर कड़ा प्रहार

नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से साफ किया कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट करना भले ही बहुत कठिन काम था, लेकिन देश के प्रधानमंत्री के तौर पर उनके लिए यह फैसला सबसे आसान फैसलों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि इजराइल ने केवल अपनी सुरक्षा के खातिर ही नहीं, बल्कि उन तमाम देशों के लोगों की भी जान बचाई जिनके प्रतिनिधि उनके मंच पर आते ही विरोध जताते हुए सभागार से बाहर चले गए थे। जब वे मंच पर आए तो बड़ी संख्या में अधिकारी और प्रतिनिधि बाहर निकल गए, जिस पर नेतन्याहू ने उन सभी को नैतिक रूप से कायर करार दिया।

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उन्होंने 07 अक्टूबर 2023 को हमास की ओर से किए गए हमलों को इजराइल के पूरे इतिहास का सबसे काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि उस भयानक घटना के बाद इजराइल ने अपनी रक्षा के लिए जो सैन्य कदम उठाए, वे पूरी तरह से जायज थे। इजराइल के दुश्मनों को पूरी उम्मीद थी कि इस हमले के बाद देश बिखर जाएगा और टूट जाएगा, लेकिन इजराइल ने डटकर मुकाबला किया। इस दौरान उन्होंने ईरान, हमास और हिजबुल्लाह के खिलाफ लगातार जारी सैन्य अभियानों का जिक्र किया और अमरीकी सरकार के समर्थन की जमकर सराहना की। उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व और इजराइल-अमरीका की मजबूत साझेदारी को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

गाजा में नरसंहार के आरोपों को नकारा

गाजा पट्टी में इजराइल की ओर से किए जा रहे हमलों और वहां की स्थिति को लेकर दुनिया भर में लग रहे नरसंहार के गंभीर आरोपों पर नेतन्याहू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सदी का सबसे बड़ा झूठ बताया। उनका कहना था कि इजराइल की सेना ने हमेशा से आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है और गाजा के भीतर लगातार भोजन, दवाइयों तथा टीकों की आपूर्ति की पूरी अनुमति दी है। हालांकि, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गाजा की मानवीय स्थिति को लेकर लगातार गंभीर चिंताएं व्यक्त की जाती रही हैं, लेकिन नेतन्याहू ने अपने भाषण में हर कदम का पुरजोर बचाव किया।

अन्य नेताओं और देशों की आलोचना

अपने संबोधन के दौरान नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की भी कड़ी आलोचना की। ममदानी ने नेतन्याहू के ऊपर युद्ध अपराध करने के गंभीर आरोप लगाए थे और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की तरफ से जारी गिरफ्तारी वारंट का सख्ती से पालन करने की बात कही थी। नेतन्याहू ने इन तमाम बातों को खारिज करते हुए ममदानी पर सीधे तौर पर हमास का समर्थन करने का पक्ष लेने का आरोप मढ़ा। इसके साथ ही उन्होंने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन पर भी जमकर निशाना साधा। 07 अक्टूबर के हमलों के बाद से ही इजराइल और तुर्किये के आपसी कूटनीतिक संबंध बेहद तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं।

नेतन्याहू ने पश्चिमी देशों खासकर ब्रिटेन और फ्रांस की ओर से इजराइल पर लगाए गए औपनिवेशिकता से जुड़े तमाम आरोपों को भी बेबुनियाद बताया। इसके अलावा उन्होंने सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा की उस मांग का भी कड़ा विरोध किया जिसमें गोलान हाइट्स से इजरायली सैनिकों को पूरी तरह वापस बुलाने की बात कही गई थी। इस पूरे भाषण ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर से भारी हलचल पैदा कर दी है और दुनिया भर के देशों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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