उत्तर कोरिया ने रूस को दिया साथ, पुतिन और किम जोंग-उन मजबूत करेंगे आपसी रिश्ते.

उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग-उन ने एक बार फिर रूस के साथ अपने देश के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने का खुला ऐलान किया है। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, किम जोंग-उन ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक खास संदेश भेजा है जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ाने और गहरा करने का पक्का वादा किया गया है। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है क्योंकि दोनों देश लगातार पश्चिमी देशों के खिलाफ अपने गठबंधन को और ज्यादा धार दे रहे हैं। आम लोगों और सामान्य पाठकों के लिए यह समझना जरूरी है कि दुनिया के इन दो बड़े देशों की नजदीकी का असर वैश्विक राजनीति पर किस तरह से पड़ रहा है।
पुतिन के बधाई संदेश का दिया जवाब
दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, यह ताजा संदेश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तरफ से उत्तर कोरिया की स्थापना की 78वीं वर्षगांठ के मौके पर बीते 9 सितंबर को भेजे गए बधाई संदेश के जवाब में दिया गया है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने पुतिन के इस बधाई संदेश के लिए उनका तहे दिल से आभार जताया और आने वाले समय में रूस के साथ हरसंभव सहयोग को आगे बढ़ाने की बात दोहराई। अपने संदेश में उन्होंने साफ कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य पारंपरिक दोस्ती, अच्छे पड़ोसी संबंधों, आपसी सहयोग और दोनों देशों के बीच मजबूत गठबंधन के रिश्तों को आधार बनाकर आगे बढ़ना है।
सैन्य और आर्थिक सहयोग पर जोर
हालांकि, अपने इस संदेश के दौरान उत्तर कोरियाई राष्ट्रपति ने यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं किया कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए संयुक्त काम वाले शब्द से असल में किन-किन खास क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात की जा रही है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इसमें दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ता हुआ सैन्य और आर्थिक सहयोग मुख्य रूप से शामिल हो सकता है। किम जोंग-उन ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों देश इतिहास की तमाम बड़ी उथल-पुथल के बावजूद अपने महान ऐतिहासिक गठबंधन का एक नया और मजबूत अध्याय लिख रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में रूस के लिए उत्तर कोरिया के पूरी तरह से अटूट समर्थन की प्रतिबद्धता को भी फिर से दोहराया है।
रणनीतिक साझेदारी और पश्चिमी देशों की चिंता
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया और रूस के आपसी संबंधों में पिछले कुछ समय के दौरान काफी तेजी से मजबूती देखने को मिली है। बीते जून, 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्योंगयांग यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए थे। इस महत्वपूर्ण समझौते के नियमों के तहत अगर किसी भी एक देश पर कोई बाहरी हमला होता है तो दूसरा देश बिना किसी देरी के तुरंत सैन्य सहायता उपलब्ध कराएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में रूस की मदद करने के लिए अपने हजारों सैनिकों के साथ-साथ पारंपरिक हथियार भी भेजे हैं। इन तमाम घटनाओं के सामने आने के बाद से मॉस्को और प्योंगयांग के बीच बढ़ती इस गहरी सैन्य साझेदारी को लेकर पश्चिमी देशों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।