आर्कटिक में फंसे 69 रूसी नागरिकों को नॉर्वे ने भेजा स्वदेश, जहाज जब्त होने से बढ़ा था विवाद

Praggya Singh sabal8 September 20262 min read23 viewsWorld
आर्कटिक में फंसे 69 रूसी नागरिकों को नॉर्वे ने भेजा स्वदेश, जहाज जब्त होने से बढ़ा था विवाद

आर्कटिक के बर्फीले इलाके में पिछले कुछ दिनों से फंसे 69 रूसी नागरिकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। नॉर्वे के अधिकारियों ने एक छोटे क्रूज जहाज को अदालत के आदेश पर जब्त किए जाने के बाद वहां फंसे सभी रूसी नागरिकों की सकुशल स्वदेश वापसी करवा दी है। यह पूरी कार्रवाई मंगलवार को नॉर्वे के किर्केनेस शहर के रास्ते पूरी की गई, जिसके बाद सभी लोग अपने देश लौट गए हैं।

जहाज की जब्ती और रूस की कड़ी प्रतिक्रिया

पूरा मामला तब शुरू हुआ जब स्वालबार्ड द्वीप पर पहुंचने वाले 'प्रोफेसर मोलचानोव' नाम के जहाज को पिछले सप्ताह एक नॉर्वेजियन अदालत के आदेश पर रोक कर जब्त कर लिया गया था। इस कार्रवाई के पीछे यूक्रेन की एक कंपनी से जुड़ा पुराना कानूनी विवाद मुख्य कारण था। जहाज रोके जाने के बाद उस पर सवार यात्री और चालक दल के सदस्य बीच में ही फंस गए थे। रूस ने इस पूरी कार्रवाई पर बहुत कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे खुलेआम समुद्री डकैती करार दिया था, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक माहौल गर्मा गया था।

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राजनयिक तनाव और मुआवजे का विवाद

इस घटना के सामने आने के बाद रूस और नाटो के सदस्य देश नॉर्वे के बीच का तनाव काफी बढ़ गया था। स्थिति को देखते हुए रूसी विदेश मंत्रालय ने पिछले सप्ताह ही मॉस्को में तैनात नॉर्वे के राजदूत को तलब किया था और इस मामले में अपना औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। अदालत में यह कानूनी कार्रवाई यूक्रेन की ऊर्जा कंपनी नाफ्टोगाज की तरफ से आगे बढ़ाई जा रही है। यह कंपनी साल 2014 में क्रीमिया के रूस द्वारा किए गए विलय के समय जब्त की गई संपत्तियों के बदले 4.22 अरब डॉलर के भारी मुआवजे के फैसले को लागू करवाने का प्रयास कर रही है। हालांकि रूस की तरफ से साफ किया गया है कि वे इस अदालती फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे।

स्वालबार्ड क्षेत्र के नियम

आपको बता दें कि स्वालबार्ड का यह क्षेत्र साल 1925 से नॉर्वे के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, साल 1920 की एक विशेष संधि के तहत रूस सहित दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों के नागरिकों को इस इलाके में बिना वीजा के भी बसने और रहने की पूरी अनुमति मिलती है। इसी विशेष व्यवस्था के तहत रूसी नागरिक वहां मौजूद थे, लेकिन कानूनी पेंच में जहाज फंसने के कारण उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था, जिसे अब नॉर्वे की मदद से सुलझा लिया गया है।

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