ईरान परमाणु तनाव के बीच पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कूटनीति का किया समर्थन
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि उन्होंने कूटनीति से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोका था, जबकि क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है।

डेट्रॉइट (मिशिगन): पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ परमाणु तनाव बढ़ने के बीच कूटनीति का समर्थन किया है। 29 अक्टूबर 2026 को एक रैली में उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं थे।
ओबामा ने जोर देकर कहा कि उनकी टीम ने 2015 के जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) के जरिए ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सफलतापूर्वक रोका था। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक समझौता किया और उन्हें कोई मिसाइल चलाने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि उन्होंने कूटनीति के जरिए काम किया।
इससे पहले 25 अक्टूबर को ओहायो में भी उन्होंने ऐसी ही बातें कही थीं। वहां उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान नीति की आलोचना करते हुए इसे अनावश्यक और अमेरिकी हितों के लिए नुकसानदेह बताया था।
दूसरी तरफ क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी फार्स न्यूज एजेंसी ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें परमाणु बम बनाने को जनमत की मांग बताया गया है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन (AEOI) के एक अधिकारी ने कहा कि राजनीतिक दबाव के बावजूद उनका परमाणु उद्योग अब परिपक्व हो चुका है।
राजनीतिक विश्लेषक मेहदी खारातियन के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल ईरान पर हमला करते हैं, तो ईरानी संसद परमाणु अप्रसार संधि (NPT) से बाहर निकल सकती है। ऐसी स्थिति में वे IAEA के निरीक्षकों की जगह चीन और रूस के निरीक्षकों को ला सकते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्रीय सहयोगियों को चेतावनी दी है कि 3 नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों के बाद सैन्य हमले हो सकते हैं। हालांकि, राजनयिकों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि इजरायल द्वारा उकसाए गए किसी भी हमले का वैश्विक बाजारों पर विनाशकारी असर होगा। इस बीच कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने तेहरान को एक नया मसौदा समझौता पेश किया है, जिस पर इस हफ्ते के अंत तक जवाब आने की उम्मीद है।