भूमध्य सागर में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, NGO वेसल ने नवजात बच्चे समेत 78 प्रवासियों को बचाया.

Nura Basta9 September 20262 min read25 viewsWorld
भूमध्य सागर में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन, NGO वेसल ने नवजात बच्चे समेत 78 प्रवासियों को बचाया.

भूमध्य सागर यानी Mediterranean Sea में मानवीय संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है और हाल ही में एक गैर-सरकारी संगठन यानी NGO के रेस्क्यू जहाज ने बड़ा कदम उठाते हुए समंदर के बीच फंसे लोगों की जान बचाई है। मंगलवार, 9 सितंबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक, Ocean Viking नामक रेस्क्यू जहाज ने तीन अलग-अलग अभियानों के दौरान कुल 78 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। इन बचाए गए लोगों में कम से कम एक नवजात बच्चा भी शामिल है, जिसने समंदर की इस खतरनाक यात्रा के दौरान मुश्किलों का सामना किया। राहत और बचाव कार्य में जुटी संस्था SOS Mediterranee के अनुसार, ये सभी प्रवासी समंदर में लगभग 24 से 26 घंटे तक फंसे रहे थे और उनकी हालत बेहद नाजुक थी।

बचाए गए लोगों में गंभीर डिहाइड्रेशन, अत्यधिक गर्मी से थकान यानी हीट एक्सॉस्टेशन और ईंधन यानी फ्यूल से जलने के घाव देखे गए। इसके अलावा, कई लोगों के पास पर्याप्त और सुरक्षित लाइफ जैकेट भी नहीं थीं, जिससे उनकी जान का खतरा और अधिक बढ़ गया था। ये सभी रेस्क्यू ऑपरेशन माल्टा के सर्च एंड रेस्क्यू जोन के भीतर चलाए गए, और इनमें से कम से कम दो नावें लीबिया से रवाना हुई थीं। इस घटना के बाद से मानवीय संगठनों ने एक बार फिर यूरोपीय देशों की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं और प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

पोर्ट की तलाश और संगठनों की चेतावनी

रिपोर्ट्स के अनुसार, 9 सितंबर 2026 तक Ocean Viking जहाज को बचाए गए लोगों को उतारने यानी डिसएम्बार्क करने के लिए किसी भी सुरक्षित पोर्ट की अनुमति नहीं मिली थी। SOS Mediterranee संगठन ने लगातार बढ़ते मौत के आंकड़ों पर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि यूरोप की सख्त नीतियों की वजह से मानवीय सहायता और बचाव कार्यों में बाधा आ रही है, और उन्होंने फिर से सरकारी स्तर पर सर्च एंड रेस्क्यू अभियान शुरू करने की मांग की है। इस पूरे मामले की अधिक जानकारी और रिपोर्ट आप ReliefWeb Report पर देख सकते हैं।

इस मामले में Médecins Sans Frontières यानी MSF ने भी अपनी बात रखी और कहा कि समंदर में लोगों की जान बचाना एक कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है। MSF ने बताया कि कठिन माइग्रेशन नीतियों के कारण जरूरतमंद लोग लगातार खतरे में पड़ रहे हैं। इसके साथ ही, मानवीय सहायता देने वाले जहाजों को राहत कार्यों के दौरान अक्सर रुकावटों, धमकियों और यहां तक कि हमलों का सामना करना पड़ता है, जो बेहद चिंताजनक विषय है।

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