तेल की कीमतों में आ सकता है बड़ा उछाल, ग्लोबल सप्लाई रुकने से बढ़ी मुश्किलें

दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर एक बड़ी और अहम रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि आने वाले महीनों में तेल के दाम और ज्यादा ऊपर जा सकते हैं। Morgan Stanley की ताजा रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के तेल बाजारों में लगातार कड़ाई बनी हुई है और कई जगहों पर सप्लाई रुकने की वजह से हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। इस स्थिति का असर सीधे तौर पर आम आदमी की जेब और ग्लोबल इकोनॉमी पर पड़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
सप्लाई रुकने और जियोपॉलिटिकल तनाव का असर
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस समय तेल और गैस बाजारों में एक साथ कई तरह की रुकावटें देखने को मिल रही हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते होने वाले एक्सपोर्ट पर रोक लगी हुई है, बाब अल-मदब से जहाजों की आवाजाही कम हो गई है और सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन भी बंद चल रही है। इसके अलावा पनामा नहर और राइन नदी में पानी का स्तर बहुत कम होने की वजह से यूरोप जाने वाले रिफाइंड प्रोडक्ट्स के शिपमेंट पर भी बुरा असर पड़ा है। इन सभी कारणों से टैंकर्स की उपलब्धता कम हो गई है और शिपिंग का किराया रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।
भविष्य के दाम और बाजार का अनुमान
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत भाव USD 100 प्रति बैरल रहने का अनुमान बरकरार रखा गया है। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि हालात को देखते हुए कीमतें इससे भी ऊपर जा सकती हैं। इसके अलावा 2027 की पहली तिमाही में यह भाव USD 95 प्रति बैरल रहने की उम्मीद है, जो बाद में घटकर दूसरी तिमाही में USD 90 और तीसरी तिमाही में USD 80 प्रति बैरल तक आ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले छह महीनों के दौरान अमेरिका से ज्यादा एक्सपोर्ट, चीन द्वारा कम आयात और पर्याप्त रिजर्व स्टॉक होने की वजह से बाजार ने इन झटकों को संभाल लिया था। लेकिन अब रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व प्रोग्राम लगभग खत्म होने वाले हैं, कमर्शियल स्टॉक कम हो गए हैं और चीन की तरफ से मांग फिर से बढ़ने लगी है। ऐसे में यदि मिडिल ईस्ट से सप्लाई सामान्य होने में देरी होती है, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है जिसका असर दुनियाभर के बाजारों पर पड़ेगा।