सऊदी अरब में तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आया.

ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतों को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। 23 सितंबर 2026 को दुनिया भर में तेल के दाम पिछले दो हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। यह लगातार छठा दिन था जब तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। बाजार में सप्लाई बढ़ने की उम्मीदों और अमेरिका तथा ईरान के बीच बातचीत को लेकर सकारात्मक माहौल बनने के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत 99 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई। इस गिरावट से आम आदमी को आने वाले दिनों में ईंधन के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद बंध रही है।
सप्लाई में सुधार और कूटनीतिक बातचीत का असर
अमेरिकी इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में यूएस क्रूड का स्टॉक अचानक 1.8 मिलियन बैरल बढ़ गया। इस गिरावट से पहले दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर काफी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 22 सितंबर को बताया कि उनके दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की ईरानी प्रतिनिधियों के साथ बातचीत बहुत ही सकारात्मक रही। हालांकि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान को लेकर सख्त चेतावनी भी दी थी, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी माना कि किसी समझौते की तरफ तेजी से कदम बढ़ रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से पहले एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने यह भी संकेत दिया कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव और ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों को हटा लेता है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोला जा सकता है। केसीएम ट्रेड के मुख्य विश्लेषक टिम वाटरर ने बताया कि वैश्विक सप्लाई को लेकर बाजार का नजरिया अब काफी सकारात्मक हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुई बैठकों ने ट्रेडर्स को एक नई उम्मीद दी है, भले ही नेताओं की तरफ से तीखे बयान लगातार आ रहे हों।
सऊदी अरब और इराक की तरफ से बढ़ी सप्लाई
सऊदी अरब द्वारा 22 सितंबर को ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को फिर से शुरू किए जाने के बाद सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं भी कम हुई हैं। ड्रोन हमलों की वजह से 11 सितंबर से यह पाइपलाइन बंद पड़ी थी। यह पाइपलाइन हर दिन 4 मिलियन बैरल तेल ले जाने की क्षमता रखती है। सऊदी अरामको को उम्मीद है कि अगले छह से आठ हफ्तों में इस पाइपलाइन को पूरी क्षमता के साथ चालू कर दिया जाएगा।
इसके अलावा इराक के तेल मंत्री बासिम मोहम्मद ने मंगलवार को ऐलान किया कि इराक ने अपने कच्चे तेल का निर्यात बढ़ाकर 3 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ज्यादा कर दिया है। तुर्की के रास्ते इस शिपमेंट को बढ़ाकर 600,000 बैरल प्रतिदिन करने की भी योजना है। गल्फ देशों में रहने वाले और वहां यात्रा करने वाले भारतीयों के लिए भी ऊर्जा बाजार की यह स्थिति राहत भरी है क्योंकि इससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है।