मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, जुलाई के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त दर्ज

मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। 4 सितंबर 2026 को तेल की कीमतों में बड़ा उछाल आया, जिससे क्रूड बेंचमार्क जुलाई के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की तरफ बढ़ रहे हैं। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.2% बढ़कर $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड फ्यूचर्स 0.3% की बढ़त के साथ $91.56 प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस पूरे हफ्ते में ब्रेंट की कीमतों में लगभग 7.1% से 7.6% तक की तेजी आई है, जबकि WTI में 9.8% से 10.4% तक का उछाल दर्ज किया गया है। आम आदमी और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि तेल महंगा होने से आने वाले दिनों में ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ सकता है, जिससे गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों की जेब पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
तनाव की मुख्य वजह और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
की कीमतों में इस आग भड़कने की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई तीखी झड़पें हैं। फरवरी के आखिर से शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने सातवें महीने में प्रवेश कर चुका है और इन हमलों में ईरानी नागरिकों समेत दर्जनों लोग हताहत हुए हैं। इस तनाव को और ज्यादा हवा तब मिली जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियमों को और सख्त कर दिया। ईरान ने चेतावनी दी है कि जो जहाज नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, उन्हें जब्त किया जा सकता है या फिर हिरासत में लिया जा सकता है। इस रास्ते से दुनिया भर का तेल गुजरता है, इसलिए यहां जरा सी भी सख्ती का असर सीधे बाजार पर पड़ता है।
दिग्गज नेताओं के बयान और वैश्विक बाजार की स्थिति
इस बीच राजनीतिक हलकों में भी सरगर्मी तेज हो गई है। इजरायली रक्षा मंत्री Israel Katz ने चेतावनी दी है कि इजराइल ईरान के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को अपना निशाना बना सकता है। दूसरी तरफ, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने 3 सितंबर 2026 को साफ शब्दों में कहा कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, तब तक वाशिंगटन तेहरान के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। हालांकि, रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि अमेरिका और चीन के समर्थन से यूक्रेन युद्ध में शांति की उम्मीदें बन सकती हैं, जिससे तेल की कीमतों पर थोड़ा बहुत दबाव जरूर कम हुआ है। बाजार के बड़े विश्लेषक इस स्थिति को लेकर काफी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों की बड़ी भविष्यवाणियां और आंकड़े
बाजार के जानकारों और बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने तेल की कीमतों को लेकर डराने वाले अनुमान लगाए हैं। ANZ बैंक ने वैश्विक स्तर पर कम हो रहे तेल भंडार का हवाला देते हुए ब्रेंट क्रूड का अपना शॉर्ट-टर्म अनुमान बढ़ाकर $95 प्रति बैरल कर दिया है। वहीं, JPMorgan का मानना है कि यदि यह संकट एक महीना और खिंचता है, तो ब्रेंट की कीमत में $7 से $8 तक का इजाफा हो सकता है और अगर रुकावटें तीन महीने चलीं तो दाम $114 तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा Goldman Sachs ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगातार बाधित रही, तो तेल का भाव $120 प्रति बैरल के आंकड़े को भी छू सकता है, हालांकि उनकी चौथी तिमाही की सामान्य भविष्यवाणी $80 प्रति बैरल पर ही टिकी हुई है। यूबीएस के ऊर्जा विश्लेषक Giovanni Staunovo का कहना है कि बाजार में यह कसावट दुनिया भर में घटते तेल भंडार की वजह से आई है।
सप्लाई के मोर्चे पर हालात को थोड़ा संतुलित करने के लिए इराक ने अगस्त के महीने में अपने तेल निर्यात को बढ़ाकर लगभग 2.34 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) कर दिया, जो कि जुलाई में मात्र 1.35 मिलियन बैरल प्रतिदिन था। मौजूदा समय में इराकी जहाजों को ही ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जा रही है। दूसरी तरफ, ईरानी अधिकारियों ने गाजा, लेबनान और ईरान में चल रहे संघर्षों पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की खामोश और बेअसर भूमिका की कड़ी आलोचना की है। गल्फ और दुनिया भर की इन आर्थिक हलचलमी का असर भविष्य में हर देश के बाजार और आम जनता पर पड़ना तय माना जा रहा है।