ब्रेंट क्रूड 104.42 डॉलर प्रति बैरल पर, WTI 96.59 डॉलर पर पहुंचा

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव और ईरान के साथ तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया। ब्रेंट क्रूड 104.42 डॉलर पर पहुंचा।

Gautam Sahu4 November 20262 min read0 viewsWorld
ब्रेंट क्रूड 104.42 डॉलर प्रति बैरल पर, WTI 96.59 डॉलर पर पहुंचा

न्यूयॉर्क: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। 4 नवंबर, 2026 को बाजार में इस समय हलचल तेज रही, क्योंकि निवेशक अमेरिका की ईरान नीति और चुनाव के शुरुआती अनुमानों पर नजर बनाए हुए हैं।

कीमतों की बात करें तो ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.8 प्रतिशत यानी 82 सेंट बढ़कर 104.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड फ्यूचर्स में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 96.59 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।

तेल की कीमतों में इस बदलाव के साथ ही अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 30 अक्टूबर को समाप्त हुए हफ्ते में अमेरिका के कच्चे तेल के भंडार में उम्मीद के उलट 52.7 लाख बैरल की गिरावट आई है।

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फिलिपनोवा की प्रियंका सचदेवा ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मिल रहे विरोधाभासी संकेतों ने व्यापारियों की सोच को जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि हालांकि कीमतों में हालिया उछाल के कारण मुनाफावसूली की संभावना है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए आपूर्ति बाधित होने की आशंका और भंडार में आई कमी कीमतों को सहारा दे रही है।

राजनीतिक अनिश्चितता भी बाजार के लिए एक बड़ा कारण बनी हुई है क्योंकि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की गिनती जारी है। शुरुआती अनुमानों से संकेत मिल रहे हैं कि डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में बहुमत हासिल कर सकती है, जिससे नियंत्रण रिपब्लिकन पार्टी से उनके पास जा सकता है।

भू-राजनीतिक जोखिमों को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें तेज हो गई हैं, जिसमें कतर ईरान से जुड़े विवादों को रोकने के लिए मध्यस्थता कर रहा है।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने 3 नवंबर को फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका के पास फिलहाल ईरान पर हमला करने की कोई तत्काल योजना नहीं है। निवेशक अब ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष को सुलझाने के लिए होने वाली राजनयिक बातचीत और वाशिंगटन के अगले कदम पर नजर टिकाए हुए हैं।

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