तेल की कीमतों में उछाल से अमेरिका में बढ़ सकती हैं ब्याज दरें, एक्सपर्ट्स की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर से पूरी दुनिया की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रिचर्ड बेन्सेल ने हाल ही में बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कच्चे तेल के दाम ऊंचे बने रहने के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व आने वाले दिनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इस खबर से आम आदमी से लेकर बड़े कारोबारियों तक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर ग्लोबल मार्केट और महंगाई पर पड़ेगा।
तेल के दाम 100 डॉलर के पार
रिया नोवोस्ती के साथ बातचीत के दौरान प्रोफेसर रिचर्ड बेन्सेल ने साफ किया कि वर्तमान में तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल या उससे ऊपर बनी हुई हैं। हालांकि बीच में कीमतों में थोड़ी बहुत गिरावट जरूर देखने को मिली थी, लेकिन इसके बावजूद इनके ऊंचे स्तर पर टिके रहने की पूरी संभावना है। इसी स्थिति को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव लगातार बनता जा रहा है। इसके अलावा, यूरोपीय यूनियन और जापान द्वारा हाल ही में ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी ने अमरीका के लिए भी इस रास्ते पर चलने की संभावना को और ज्यादा मजबूत कर दिया है।
महंगाई बढ़ने का खतरा और आम जीवन पर असर
अर्थव्यवस्था के जानकारों और एक्सपर्ट्स ने यह कड़ी चेतावनी दी है कि कच्चे तेल के दाम बहुत अधिक होने की वजह से पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। जिन भी सामानों और उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह यानी फिजिकली ट्रांसपोर्ट करना पड़ता है, उन सभी की लागत बढ़ जाएगी। जब ढुलाई महंगी होगी तो रोजमर्रा की इस्तेमाल वाली चीजों से लेकर हर छोटी-बड़ी चीज के दाम बाजार में स्वतः बढ़ जाएंगे। एक बार जब बाजार में खुदरा कीमतें यानी रिटेल प्राइसेज बढ़ जाती हैं और अर्थव्यवस्था इस महंगे माहौल के हिसाब से ढल जाती है, तो भविष्य में कच्चे तेल के दाम कम होने पर भी रोजमर्रा की चीजों के रेट्स को नीचे लाना बहुत मुश्किल हो जाता है। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी बनाते समय इस जमीनी हकीकत को पूरी तरह ध्यान में रखना चाहिए।
पश्चिम एशिया का संघर्ष और यूरोपियन सेंट्रल बैंक का फैसला
पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और संघर्ष के कारण लगातार महंगाई का दबाव बना हुआ है। इसी गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने हाल ही में गुरुवार को अपनी तीन मुख्य ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर दी है। यूरोपीय देशों के इस कदम के बाद अब सभी की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी हुई हैं, जो अगले हफ्ते ही ब्याज दरों पर अपना आधिकारिक फैसला लेने वाला है। इस फैसले का सीधा असर लोन की ईएमआई, निवेशकों और आम लोगों के खर्चों पर देखने को मिलेगा।