Strait of Hormuz के पूर्व में समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आया तेल टैंकर, ईरान ने की पुष्टि

Strait of Hormuz के पास एक तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आया। ईरान ने इसे नियमों का उल्लंघन बताया है।

Gautam Sahu27 October 20262 min read0 viewsWorld
Strait of Hormuz के पूर्व में समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आया तेल टैंकर, ईरान ने की पुष्टि

तेहरान: Strait of Hormuz के पूर्व में एक अज्ञात तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आ गया, जिससे जहाज को भारी नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई। ईरान की नौसेना ने इस घटना की पुष्टि की है।

IRNA न्यूज एजेंसी की 27 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी नौसेना ने कहा कि यह जहाज समुद्री नियमों का उल्लंघन कर रहा था। जहाज ने अपनी ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन और ट्रैकिंग प्रणालियों को बंद कर दिया था और वह एक प्रतिबंधित व खतरनाक क्षेत्र से गुजरने की कोशिश कर रहा था।

ईरानी सेना का कहना है कि Strait of Hormuz बंद है और बिना समन्वय के यहां ट्रैफिक चलना असुरक्षित है। उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि नेविगेशन सिस्टम बंद रखकर चलने वाले जहाजों को सख्त जवाब दिया जाएगा।

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सितंबर 2026 में ईरान के शीर्ष राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई ने एक नए प्रतिबंधित समुद्री क्षेत्र की घोषणा की थी। उन्होंने साफ किया था कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने वाले किसी भी जहाज पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

अक्टूबर 2026 का महीना Strait of Hormuz और आसपास के जलमार्गों में वाणिज्यिक जहाजों के लिए सबसे घातक साबित हुआ है, जहां अब तक 28 हमलों की पुष्टि हो चुकी है। इस स्थिति के कारण युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम बढ़ने की आशंका है।

दूसरी ओर, पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने 27 अक्टूबर को घोषणा की कि दक्षिण कोरियाई कंपनी सिनोकोर के जहाजों के खिलाफ 1 नवंबर से कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम पिछले ट्रांजिट उल्लंघनों के कारण उठाया गया है।

इसी बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियां इस क्षेत्र से पीछे हट गई हैं। अमेरिका वर्तमान में ईरान से जुड़े जहाजों के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी लागू रखे हुए है।

हालांकि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्यों के माध्यम से पारगमन मार्ग की गारंटी देती है, लेकिन ईरान ने 1982 के इस कन्वेंशन की पुष्टि नहीं की है और वह इस क्षेत्र में अपने स्वयं के समुद्री प्रतिबंध लागू कर रहा है।

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