Strait of Hormuz में तेल टैंकरों पर हमला, बढ़ी वैश्विक चिंता

Strait of Hormuz में तीन तेल टैंकरों पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल्स (गोले) से हमला किए जाने की खबर ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। इस हमले के बाद मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव और अधिक गहरा गया है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को हुई इस घटना ने समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन जहाजों को निशाना बनाया गया
शिपिंग इंटेलिजेंस सेवा 'मैरिस्क' (Marisks) के अनुसार, जिन जहाजों पर हमला हुआ उनमें एक क्रूड ऑयल टैंकर, एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) कैरियर और एक अन्य अज्ञात जहाज शामिल है। इन जहाजों की पहचान लाइबेरियाई ध्वज वाले Al Ruwais, Mersin Prosperity और Sinbad के रूप में की गई है।
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (UKMTO) ने इस हमले की चेतावनी जारी करते हुए वाणिज्यिक जहाजों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष अपने चरम पर है।
कूटनीति की विफलता और बढ़ता संघर्ष
इस हमले के पीछे के तनाव को समझने के लिए हालिया कूटनीतिक घटनाक्रमों पर नजर डालना जरूरी है। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची और उनके प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका छोड़ने का आदेश दिया था, जिसके बाद बातचीत पूरी तरह ठप हो गई है।
हालांकि, कतर के माध्यम से ईरान ने जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए सात दिनों की एक 'ट्रस्ट-बिल्डिंग' योजना का प्रस्ताव दिया था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही ऐसे किसी युद्धविराम के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
ट्रंप का बड़ा बयान और क्षेत्रीय स्थिति
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका का Strait of Hormuz पर "लगभग पूर्ण नियंत्रण" है। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन दिनों में तेल का प्रवाह ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर रहा है और उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष "बहुत जल्द, किसी भी तरह से" समाप्त हो जाएगा।
दूसरी ओर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का दावा है कि उनके और अमेरिकी सेना के बीच सैन्य टकराव "हर 24 घंटे में" हो रहे हैं। ईरान ने हाल ही में एक अमेरिकी REMUS 600 अंडरवॉटर ड्रोन को भी पकड़ने का दावा किया है, जिसे वह जासूसी से जोड़कर देख रहा है।
वर्तमान में, इराक से अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर भी दोनों देश इसे अपनी-अपनी रणनीतिक जीत बता रहे हैं, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।