पश्चिम एशिया में अमेरिका की पुरानी हुकूमत खत्म, ईरान के नेता का बड़ा बयान सामने आया.

तेहरान में ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ ने रविवार को एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में अमेरिका की पुरानी व्यवस्था अब पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है। उन्होंने इस दौरान देश के राजनीतिक और अभिजात वर्ग के हलकों में दो ऐसी गंभीर रणनीतिक भूलों की ओर इशारा किया, जो मौजूदा संघर्ष से निपटने की देश की क्षमता को कमजोर कर सकती हैं। ईरानी संसद को संबोधित करते हुए गालिबफ ने स्पष्ट किया कि पिछले सात महीनों के दौरान ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी तरह की आक्रामकता के सामने चुपचाप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि तेहरान का मुख्य उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाना और ईरानी जनता की इच्छा को सर्वोपरि रखना है।
ईरान के सामने दो बड़ी रणनीतिक चुनौतियां
गालिबफ ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि देश के राजनीतिक हलकों में दो तरह की सोच चल रही है जो नुकसानदेह साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पहली भूल वह दृष्टिकोण है जो बिना किसी स्पष्ट योजना या युद्ध को समाप्त करने के तरीके के केवल युद्ध की बात करता है। इस तरह की सोच देश को बिना किसी ठोस रणनीति के अंतहीन युद्ध और बर्बादी की तरफ धकेलती है। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी सोच भी मौजूद है जो देश की ताकत को कम आंकती है और ईरान को कमजोर मानकर दुश्मन की तरफ से थोपी गई शर्तों को चुपचाप स्वीकार करने की सलाह देती है। उन्होंने कहा कि ये दोनों ही रास्ते देश की आंतरिक एकजुटता और एकता को तोड़ने का काम करते हैं, जिससे अंततः दुश्मन के इरादे ही पूरे होते हैं।
क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर बात करते हुए गालिबफ ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि इस क्षेत्र के इस्लामिक देश मिलकर एक नई व्यवस्था का निर्माण करें। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि ईरान का भविष्य किसी के सामने हाथ फैलाने से नहीं बल्कि साहस, सूझबूझ और संघर्ष के बल पर तय होगा। दूसरी ओर, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि तेहरान ने अमेरिकी सरकार के सामने बातचीत शुरू करने के लिए कुल 7 शर्तें रखी हैं। उनका कहना था कि यदि अमेरिका अपनी बनाई हुई मुश्किलों से बाहर निकलना चाहता है, तो उसे ईरान के अधिकारों और शर्तों को मानना ही होगा। वर्तमान समय में पश्चिम एशिया के भीतर सैन्य और कूटनीतिक तनाव लगातार बने हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर अनिश्चितता का माहौल गहराता जा रहा है।