फारस की खाड़ी की सुरक्षा में ईरान को शामिल करे दुनिया ओमान के विदेश मंत्री की मांग
ओमान के विदेश मंत्री सैयद बदर अलबुसैदी ने कहा कि ईरान के बिना फारस की खाड़ी में स्थायी सुरक्षा संभव नहीं है।

कैम्ब्रिज: ओमान के विदेश मंत्री सैयद बदर अलबुसैदी ने फारस की खाड़ी के लिए एक ऐसी सुरक्षा रूपरेखा तैयार करने की वकालत की है जिसमें ईरान भी शामिल हो। 26 अक्टूबर 2026 को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दिए अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने कहा कि ईरान के बिना इस क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा ढांचा बनाना नामुमकिन है।
अलबुसैदी ने विदेशी शक्तियों की उन नीतियों की आलोचना की जो ईरान को क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था से बाहर रखने की कोशिश करती हैं और उसे एक खतरे के रूप में पेश करती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि 1979 से चली आ रही सुरक्षा मॉडल विफल रहा है, जबकि इस दौरान सैन्य खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई और विदेशी सैन्य ठिकानों की संख्या बढ़ी है।
विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय देशों से अपील की कि वे बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लें। उन्होंने खाड़ी के आठ तटवर्ती देशों के बीच एक 'गैर-आक्रामकता समझौते' का प्रस्ताव रखा और इसके लिए 1976 की मस्कट पहल का उदाहरण दिया।
ओमान की राजनयिक भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मस्कट अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बातचीत में मदद कर रहा है। यह चर्चा मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी को लेकर है, ताकि जलमार्ग से सुरक्षित पारगमन के लिए तकनीकी व्यवस्थाएं की जा सकें।
इसी दौरान ईरान, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के रक्षा और खुफिया अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक तेहरान में हुई, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा की गई। दूसरी ओर, ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य जहाजों और विदेशी ठिकानों की मौजूदगी का विरोध किया है।