ओमान में जहाज पर ड्रोन हमले के बाद दो भारतीय नाविक लापता, परिजनों ने कप्तान पर लापरवाही का आरोप लगाया

मस्कट: ओमान के सोहार पोर्ट के पास एक जहाज पर हुए ड्रोन हमले में दो भारतीय नाविक लापता हो गए हैं। लापता नाविकों में देवरिया के 26 वर्षीय बीर बहादुर यादव और कुशीनगर के 20 वर्षीय अमित सिंह शामिल हैं। 11 अक्टूबर को निकारागुआ ध्वज वाले एमटी पेट्रो डॉल्फिन पर हुए इस हमले के दौरान नौ भारतीय और एक बांग्लादेशी चालक दल के सदस्य बचा लिए गए थे।
लापता नाविकों के परिजनों ने जहाज के कप्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कप्तान ने बिना किसी सही गिनती या खोज अभियान के ही जहाज खाली करने का आदेश दे दिया, जो कि बड़ी लापरवाही है। अमित सिंह के चाचा और मर्चेंट नेवी के सेकंड ऑफिसर रविंद्र सिंह ने बताया कि जहाज के जनरेटर और इमरजेंसी यूनिट काम नहीं कर रहे थे, जिससे आग बुझाने और बचाव कार्य में दिक्कत आई। उन्होंने इस मामले की पूरी जांच के लिए शिपिंग महानिदेशालय (DG Shipping) को याचिका भेजी है।
बीर बहादुर यादव के भाई मंटू यादव के मुताबिक, बीर ने 10 अक्टूबर को सुरक्षा स्थिति को लेकर डर जताया था। रिश्तेदारों ने बताया कि जब ड्रोन ने हमला किया, तब चालक दल के सदस्य मुख्य डेक पर प्रभाव बिंदु के पास मौजूद थे। बीर बहादुर ट्रेनी इंजन रेटिंग थे और दोनों नाविक अपनी पहली बड़ी सेलिंग भूमिका में थे।
मस्कट में भारतीय दूतावास ओमान के अधिकारियों और शिपिंग कंपनी के साथ मिलकर खोज और बचाव अभियान चला रहा है। दूतावास जहाज पर जाकर आगे की जांच भी करेगा। शिपिंग कंपनी ने बचे हुए सदस्यों को वापस भेजने और उनकी बकाया सैलरी देने का वादा किया है। फॉरवर्ड सीमेंस यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने नाविकों की सुरक्षा बढ़ाने और लापता लोगों की स्थिति पर तुरंत अपडेट देने की मांग की है।
विदेश मंत्रालय ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की निंदा की है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि एमटी वैल्थेरा पर हुए एक अलग हमले के बाद सभी भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित थे।
क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। 10 अक्टूबर को किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हूती समर्थकों के हमले में मोहम्मद यूसुफ अली नामक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 11 अन्य घायल हुए। इनमें से कई लोग अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं। इस वजह से एयर इंडिया और इंडिगो समेत अन्य एयरलाइनों की उड़ानें 17 अक्टूबर तक निलंबित कर दी गई हैं। रियाद में भारतीय दूतावास ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। फरवरी के अंत से अब तक संघर्ष के कारण 3 लाख से ज्यादा भारतीय इस क्षेत्र से वापस लौट चुके हैं।