ओमान में अल नीनो का कहर: मई 2027 तक भारी बारिश और ठंड का अलर्ट हुआ जारी.

ओमान: ओमान मौसम के एक लंबे और मुश्किल दौर के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सल्तनत में सितंबर 2026 से मई 2027 तक अल नीनो का मज़बूत प्रभाव देखने को मिल सकता है। सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) की ओर से नेशनल मल्टी-हैज़र्ड अर्ली वार्निंग सेंटर (NMHEWC) के हवाले से जारी राष्ट्रीय रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक़ यह अल नीनो पैटर्न दुनिया भर में तेज़ी से मज़बूत हो रहा है। फ़रवरी 2027 तक इसके बने रहने की लगभग सौ फ़ीसदी संभावना है, और यह 1950 के बाद के सबसे शक्तिशाली आयोजनों में से एक बन सकता है। अमेरिकी संस्था NOAA के आँकड़े भी इस तेज़ी की पुष्टि करते हैं। मौसम विभाग के अनुसार अल नीनो अपने चरम पर नवंबर और दिसंबर 2026 में पहुँच सकता है।
बारिश को लेकर सबसे बड़ा संकेत उत्तरी ओमान के लिए है। अक्टूबर और नवंबर में वहाँ औसत से ज़्यादा बारिश होने की उम्मीद है, जबकि दिसंबर में बारिश सामान्य के आसपास रह सकती है, फिर भी उत्तरी इलाक़ों में सामान्य से अधिक वर्षा दोबारा देखी जा सकती है। इसका मतलब है कि शहरों की सड़कों, नालों और निचले इलाक़ों में पानी जमा होने का ख़तरा बढ़ सकता है।
तापमान और ठंड का भी अंदेशा
अक्टूबर से दिसंबर 2026 के दौरान पूरे देश में तापमान औसत से ऊपर रहने का अनुमान है। वहीं दिसंबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच ठंड की कुछ तेज़ लहरें आ सकती हैं। ऊँची पहाड़ियों और चोटियों पर तापमान शून्य से नीचे जाने की आशंका जताई गई है। यानी मैदानी इलाक़ों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में भी लोगों को सावधानी बरतनी होगी।
इसके अलावा आँकड़े बताते हैं कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच अरब सागर में उष्णकटिबंधीय तूफ़ानी प्रणाली बनने की बुनियादी संभावना भी बनी हुई है।
NMHEWC के पिछले 45 वर्षों के विश्लेषण में अल नीनो और नमी बढ़ने के बीच साफ़ संबंध दिखा है। पिछले अल नीनो वर्षों में सितंबर से नवंबर के बीच बारिश दीर्घकालिक औसत से लगभग 20 प्रतिशत, दिसंबर से फ़रवरी के बीच 31 प्रतिशत और मार्च से मई के बीच करीब 54 प्रतिशत तक ज़्यादा रही थी। यही आँकड़े इस बार की तैयारी को गंभीर बनाते हैं।
CAA के मुताबिक़ आने वाले गर्म हालात वैश्विक और क्षेत्रीय जलवायु कारकों के मेल से बन रहे हैं। NMHEWC लगातार निगरानी कर रहा है और सरकारी, सैन्य व निजी क्षेत्र की संस्थाओं के साथ मिलकर तैयारी में जुटा है। संभावित ख़तरों में भारी बारिश, अचानक बाढ़, तेज़ हवाएँ, ओले, ऊँची लहरें और सड़कों व ज़रूरी सेवाओं में रुकावट शामिल हैं।
अक्टूबर 2026 में हुई राष्ट्रीय आपातकालीन प्रबंधन समिति की बैठक में देश की आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को और मज़बूत करने पर चर्चा हुई थी। अब ज़रूरत इस बात की है कि आम लोग भी मौसम की ताज़ा जानकारी पर नज़र रखें, ज़रूरी सावधानियाँ अपनाएँ और अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।