Oman CEPA Update: ओमान और भारत के बीच बिजनेस फोरम का होगा आयोजन, प्रोफेशनल्स को मिलेगी बड़ी राहत.

Nura Basta4 September 20263 min read45 viewsOman
Oman CEPA Update: ओमान और भारत के बीच बिजनेस फोरम का होगा आयोजन, प्रोफेशनल्स को मिलेगी बड़ी राहत.

ओमान और भारत के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। ओमान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी OCCI आगामी 9 सितंबर 2026 को मस्कट के प्रसिद्ध The St. Regis होटल में ओमान-भारत बिजनेस फोरम की मेजबानी करने जा रहा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच हुए कॉम्प्रिहेंशिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट यानी CEPA को पूरी तरह से लागू करना और इसके फायदों को जमीन पर उतारना है। यह ऐतिहासिक समझौता मस्कट में 18 दिसंबर 2025 को साइन किया गया था और रॉयल डिक्री संख्या 30/2026 के तहत मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक तौर पर 1 जून 2026 से लागू हो चुका है। भारतीय दूतावास मस्कट से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग US$11.187 बिलियन तक पहुंच गया था जो अपने आप में एक बहुत बड़ा आंकड़ा है।

इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफिरीज के नियमों में बड़ा बदलाव

इस बिजनेस फोरम का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु CEPA के तहत आने वाले इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफिरीज का प्रावधान है। भारतीय वाणिज्य विभाग की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, ओमान ने भारतीय कंपनियों के लिए इंट्रा-कॉर्पोरेट ट्रांसफिरीज की सीमा को 20% से बढ़ाकर सीधा 50% कर दिया है। इस बड़े बदलाव का सीधा मतलब यह है कि ओमान में काम कर रही भारतीय मूल की कंपनियां अब भारत से अपने मैनेजरों, स्पेशलिस्ट्स और तकनीकी स्टाफ को अधिक संख्या में ओमान बुला सकेंगी। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया ओमान के स्थानीय श्रम कानूनों, इमिग्रेशन नियमों और सेक्टर से जुड़े दिशा-निर्देशों के अधीन ही काम करेगी। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी को ऑटोमैटिक वर्क वीजा मिल जाएगा या स्थानीय ओमानाइजेशन के नियमों को दरकिनार कर दिया जाएगा, लेकिन इससे कुशल कामगारों के लिए ओमान आने-जाने का रास्ता काफी हद तक आसान जरूर हो गया है।

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कॉन्ट्रैक्टुअल सर्विस सप्लायर्स और ठहरने की अवधि

इस समझौते के तहत कॉन्ट्रैक्टुअल सर्विस सप्लायर्स के लिए ओमान में रुकने की अनुमति को भी काफी बढ़ा दिया गया है। पहले जहां ऐसे लोग केवल 90 दिनों तक रुक सकते थे, वहीं अब इस अवधि को बढ़ाकर सीधे दो साल कर दिया गया है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर इसे दो साल के लिए और आगे बढ़ाने का विकल्प भी रखा गया है। यह खास प्रावधान उन स्पेशलिस्ट्स की मदद के लिए बनाया गया है जो अकाउंटिंग, टैक्सेशन, आर्किटेक्चर, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी और कंस्ट्रक्शन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। फोरम के दौरान इस बात पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी कि कैसे कुछ चुनिंदा सेवा क्षेत्रों में 100% तक विदेशी स्वामित्व यानी फॉरेन ओनरशिप की अनुमति दी जा रही है, हालांकि इसके लिए योग्यता तय नियमों और लाइसेंसिंग अथॉरिटीज की मंजूरी पर ही निर्भर करेगी।

किन सेक्टरों पर रहेगा खास जोर

इस बिजनेस फोरम में जिन प्राथमिकता वाले सेक्टरों पर मुख्य रूप से चर्चा की जाएगी उनमें लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग, फूड सिक्योरिटी, माइनिंग, टूरिज्म, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी शामिल हैं। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास के आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक ओमान में कुल भारतीय आबादी लगभग 674,950 थी, जिसमें से 526,496 भारतीय नागरिक वैध वर्क वीजा पर वहां रह रहे थे। ओमान में रह रहे इन भारतीयों में बड़ी संख्या में डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, टीचर्स, लेक्चरर्स, नर्सेस और मैनेजर्स शामिल हैं। इस नए समझौते और प्रोफेशनल मोबिलिटी प्रतिबद्धताओं के लागू होने से इन सभी पेशवरों को भविष्य में अपने करियर और कामकाज के मोर्चे पर काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है, जिससे दोनों देशों के आपसी व्यावसायिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

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