ओमान में बच्चों के लिए बड़ी चेतावनी, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स पर मंडरा रहा है गंभीर खतरा.

ओमान के अधिकारियों ने इंटरनेट पर बच्चों के साथ होने वाले अपराधों और ऑनलाइन ग्रूमिंग को लेकर एक सख्त चेतावनी जारी की है। ओमान रेडियो पर बातचीत के दौरान डॉ. हुसैन बिन अली अल सेनानी ने बताया कि आज के समय में सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक गेम्स का इस्तेमाल करके अपराधी बच्चों को अपना निशाना बना रहे हैं। यह डिजिटल जालसाजी बच्चों को गंभीर अपराधों और मानव तस्करी जैसे मामलों में धकेल सकती है, जिसे लेकर माता-पिता को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है।
साइबर अपराध और नए कानून
बढ़ते डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पब्लिक प्रोसीक्यूशन ने एक खास साइबर क्राइम यूनिट का गठन किया है। ओमान में कानूनी सुरक्षा को मजबूत करते हुए रॉयल डिक्री नंबर 61/2026 के तहत साइबर अपराध कानून की धारा 36/7 को लागू किया गया है। इस नए कानून के मुताबिक 15 साल से कम उम्र के बच्चों या घरेलू कामगारों का मीडिया कंटेंट में गलत इस्तेमाल करने पर तीन साल तक की जेल और 5,000 ओमानी रियाल तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा मानव तस्करी के खिलाफ लड़ने के लिए रॉयल डिक्री नंबर 78/2025 के तहत कड़े प्रावधान भी बनाए गए हैं.
सरकारी एजेंसियां और संस्थाओं की तैयारी
इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए देश में संस्थागत प्रयास भी तेज किए गए हैं। विदेश मंत्रालय के राजनीतिक मामलों के अंडरसेक्रेटरी शेख खलीफा अलहार्थी की अध्यक्षता में नेशनल कमेटी टू कॉम्बैट ह्यूमन ट्रैफिकिंग बचाव और सुरक्षा के लिए लगातार काम कर रही है। इसके साथ ही टेलीकम्युनिकेशंस रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी TRA सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे टिकटॉक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट के इस्तेमाल के लिए न्यूनतम उम्र 16 साल तय करने पर विचार कर रही है। यूनिसेफ ओमान और सामाजिक विकास मंत्रालय मिलकर राष्ट्रीय बाल सुरक्षा मैनुअल को अपडेट करने में जुटे हैं।
घटनाओं के बाद प्रशासन की सख्ती
अगस्त 2026 में पब्लिक प्रोसीक्यूशन की पत्रिका 'सोसाइटी एंड लॉ' में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था, जिसमें घरेलू हिंसा से भागने वाले बच्चे वीडियो गेम प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल तस्करी के जाल में फंस गए थे। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ओमान सरकार ने पिछले महीने 30 जुलाई 2026 को मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस के मौके पर बच्चों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया था। प्रशासन की ओर से बार-बार यही अपील की जा रही है कि माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और उन्हें किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी निजी जानकारी साझा करने से रोकें।