ओमान में लॉस्टर सीजन की शुरुआत, जान लें ये जरूरी नियम

ओमान में समुद्र के खजाने का एक खास दौर आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है, जिसका इंतजार स्थानीय मछुआरे और समुद्री जीवों के शौकीन बेसब्री से करते हैं। ओमान में स्पाइनी लॉस्टर यानी कांटेदार झींगा मछली पकड़ने का oman lobster fishing season अब शुरू हो गया है, जो 30 नवंबर तक चलेगा। इस दो महीने की अवधि में तटवर्ती इलाकों में एक अलग ही हलचल देखने को मिलती है, क्योंकि यह समय मछुआरों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया होता है और बाजारों में इसकी खासी मांग रहती है।
स्थानीय भाषा में 'शर्खा' के नाम से जाना जाता है यह सीजन
ओमान के तटीय क्षेत्रों में लॉस्टर पकड़ने के इस खास मौसम को स्थानीय रूप से 'शर्खा' कहा जाता है। कृषि, मत्स्य पालन और जल संसाधन मंत्रालय ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि इस दौरान केवल अनुमोदित लॉस्टर ट्रैप या पिंजरों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मनमाने तरीकों या जालों के इस्तेमाल पर रोक है ताकि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बचाया जा सके और भविष्य के लिए स्टॉक सुरक्षित रहे।
पिछले साल कैसा रहा था कारोबार?
आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल इस कारोबार से अर्थव्यवस्था को काफी मजबूती मिली थी। ओमान समाचार एजेंसी के अनुसार, पिछले साल कुल उत्पादन लगभग 645 मीट्रिक टन तक पहुंच गया था, जिसका बाजार मूल्य करीब 42.55 लाख ओमान रियाल था। पिछले साल औसत कीमत लगभग 6.601 ओमान रियाल प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी।
प्रमुख गवर्नरट का योगदान
- अल वुस्ता: इस क्षेत्र ने कुल उत्पादन का लगभग 44.7 प्रतिशत यानी 288.5 टन का योगदान दिया, जिसकी कीमत 17.57 लाख ओमान रियाल थी।
- धोफर: यहां लगभग 212.8 टन (33 प्रतिशत) उत्पादन हुआ, जिसका मूल्य 17.05 लाख ओमान रियाल रहा।
- दक्षिण अल शार्कियह: इस गवर्नरट में लगभग 135.7 टन (21.1 प्रतिशत) उत्पादन दर्ज किया गया, जो 7.75 लाख ओमान रियाल का था।
अन्य गवर्नरट में उत्पादन सीमित मात्रा में ही दर्ज किया गया था।
बाजारों में रौनक और खरीदारों के लिए सलाह
मस्कट, सोहर, सुर और सलाह के प्रसिद्ध बाजारों जैसे मत्राह फिश सूक और सीब मार्केट में खरीदारों और स्थानीय लोगों की भीड़ बढ़ने लगी है। मंत्रालय ने स्थानीय मछुआरों के साथ-साथ प्रवासी समुदाय को भी टिकाऊ और कानूनी तरीकों का पालन करने की सलाह दी है। बाजार में खरीदारी करते समय ताजा लॉस्टर और उसके वजन की सही जांच करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि खुदरा कीमतें पिछले औसत से भिन्न हो सकती हैं।