Oman में नेपाली मजदूरों की एंट्री बढ़ी, बाकी Gulf देशों में आई 52% की भारी गिरावट.

गल्फ देशों में काम करने जाने वाले नेपाली कामगारों के आंकड़ों में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नेपाल के Department of Foreign Employment की तरफ से आधिकारिक डेटा जारी किया गया है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक छह गल्फ देशों यानी जीसीसी राज्यों में नए लेबर परमिट जारी होने की संख्या में 52.12% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष की शुरुआत से लेकर सितंबर के बीच यह बड़ी गिरावट सामने आई है। नए परमिट की संख्या 228,165 से घटकर सीधे 109,249 पर आ गई है। इस पूरी स्थिति में केवल ओमान एक ऐसा देश रहा जहां नेपाली कामगारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है जबकि बाकी सभी जगहों पर हालात बिल्कुल अलग रहे।
बाकी गल्फ देशों में क्या रहा हाल
अगर अलग-अलग देशों की बात करें तो यूएई यानी यूनाइटेड अरब एमिरेट्स में नए कामगारों के आने में 59.05% की बड़ी कमी आई है। इसके अलावा सऊदी अरब में यह आंकड़ा 57.02% तक गिर गया। बहरीन में 45.49%, कुवैत में 42.93% और कतर में नए नेपाली कामगारों के आने में 35.08% की कमी दर्ज की गई। गल्फ के इन सभी प्रमुख देशों में लेबर परमिट घटने की मुख्य वजह तनावपूर्ण माहौल और काम से जुड़े नियमों में बदलाव को माना जा रहा है। काठमांडू की रिक्रूटमेंट एजेंसियों का कहना है कि उन्हें लगातार डिमांड लेटर रद्द होने की जानकारियां मिल रही हैं और छुट्टी पर गए कई वर्कर वापस भी नहीं लौट पा रहे हैं। इस पूरी स्थिति का असर कंस्ट्रक्शन, सुरक्षा, हॉस्पिटैलिटी और घरेलू काम जैसे कई सेक्टरों पर साफ पड़ रहा है। गल्फ देशों में पहले से रह रहे भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए भी रिप्लेसमेंट हायरिंग धीमी हो गई है और कुछ जगहों पर लोगों को बिना वेतन की छुट्टी यानी अनपेत लीव पर भी भेजा जा रहा है हालांकि रेमिटेंस भेजने के रास्ते अभी भी सामान्य रूप से चालू हैं।
ओमान बना इकलौता गल्फ देश जहां बढ़ी भर्ती
तमाममुश्किलों के बीच ओमान इस पूरे क्षेत्र में इकलौता ऐसा देश रहा जहां नेपाली कामगारों की भर्ती में 24.33% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ओमान की इस तुलनात्मक स्थिरता के पीछे उसकी तटस्थ नीति को बड़ा कारण माना जा रहा है जो इस संघर्ष के दौरान बनी रही। ओमान के Ministry of Labour ने मस्कट में खाली पड़ी जगहों के लिए सक्रिय रूप से विज्ञापन दिए और वहां की स्थिति को बेहतर बताया। इसके अलावा ओमान में अवैध रूप से काम करने से जुड़े मामलों में भी कमी आई है जो इस साल जनवरी से जून के दौरान घटकर 17,577 रह गए जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 31,421 था। हालांकि ओमान में नेपाली workers आ रहे हैं लेकिन देश अपनी 'ओमानisation' पॉलिसी पर भी लगातार काम कर रहा है। ओमान सरकार ने कंप्यूटर प्रोग्रामर, इंजीनियर और ऑपरेटर जैसे कई वीज़ा कैटेगरी को बाहर से आने वाले लोगों के लिए बंद कर दिया है और यह नियम इसी साल 1 जनवरी से लागू हो चुका है। इसके साथ ही वेबसाइट डिजाइनर और ऑपरेशन एनालिस्ट के पदों पर भी अगले साल यानी 1 जनवरी से प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। यही वजह है कि नए आने वाले नेपाली कामगारों को अब उन सेक्टरों में जगह मिल रही है जो इन आरक्षित श्रेणियों में शामिल नहीं हैं। नेपाल सरकार ने भी इस साल मार्च के महीने में कुछ समय के लिए गल्फ देशों के लिए लेबर अप्रूवल पर रोक लगाई थी जिसके बाद से बाजार का स्तर अभी तक पूरी तरह संभल नहीं पाया है।