क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ओमान की बड़ी पहल, आठ देशों के बीच 'गैर-आक्रामक समझौते' का प्रस्ताव
ओमान ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ईरान और इराक सहित आठ खाड़ी देशों के बीच एक गैर-आक्रामक समझौते का प्रस्ताव रखा है।

मस्कट: ओमान ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आठ तटवर्ती देशों के बीच एक गैर-आक्रामक समझौते (non-aggression pact) का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना और क्षेत्रीय जिम्मेदारी के जरिए सुरक्षा ढांचे को तैयार करना है।
इस प्रस्तावित समझौते में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के छह सदस्य देशों—बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात—के साथ-साथ इराक और ईरान को भी शामिल किया गया है। ओमान का मानना है कि एक समावेशी क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के लिए यह समझौता बुनियादी जरूरत है।
ओमान के विदेश मंत्री सैयद बदर अलबुसैदी ने 26 अक्टूबर 2026 को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में 'कॉम्प्रिहेंसिव सिक्योरिटी इन द गल्फ' विषय पर दिए गए एक व्याख्यान के दौरान इस रणनीतिक विजन का विवरण दिया। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अलबुसैदी ने इस बात पर जोर दिया कि आठों देशों को आपसी विश्वास बढ़ाने और राजनयिक संवाद को प्राथमिकता देनी चाहिए ताकि किसी भी तरह के धमकी भरे व्यवहार को रोका जा सके और लंबे समय तक स्थिरता बनी रहे।
यह पहल 1976 के एक पुराने उदाहरण से प्रेरित है, जब मस्कट में आठ तटवर्ती देशों के विदेश मंत्रियों ने सामूहिक सुरक्षा ढांचे पर चर्चा करने के लिए बैठक की थी। विशेषज्ञों का तर्क है कि यह ढांचा उन पुराने मॉडलों से अलग होगा जिनमें विदेशी सैन्य हस्तक्षेप पर निर्भरता थी, जिससे अक्सर स्थानीय सुरक्षा व्यवस्थाएं पीछे छूट जाती थीं।
वासेदा यूनिवर्सिटी में इस्लामिक एरिया स्टडीज के चेयर अब्दुल्ला बाबूड ने अल जज़ीरा के एक लेख में कहा कि ओमान इस तरह की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक खास स्थिति में है। ओमान ने हमेशा एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और पहले भी क्षेत्रीय देशों और अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के बीच उच्च स्तरीय राजनयिक संवाद की मेजबानी की है।