ओमान ने इसराइल पर कड़ा रुख अपनाया, यूरोपीय देशों के साथ मिलकर बस्तियों के विस्तार का किया विरोध.

Aanya9 September 20262 min read26 viewsOman
ओमान ने इसराइल पर कड़ा रुख अपनाया, यूरोपीय देशों के साथ मिलकर बस्तियों के विस्तार का किया विरोध.

ओमान की सरकार ने इसराइल द्वारा की जा रही बस्तियों के विस्तार पर अपना कड़ा विरोध जताया है और इस मामले में यूरोपीय देशों के संयुक्त बयान का पूरी तरह से समर्थन किया है। ओमान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इस तरह की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन करती हैं। यह पूरा मामला 8 सितंबर 2026 का है जब दुनिया के कई प्रमुख देशों ने इसराइल की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई थी। आम जनता और खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों के बीच यह मुद्दा काफी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इससे मध्य पूर्व क्षेत्र की स्थिति पर सीधा असर पड़ता है।

बारह देशों का संयुक्त बयान और व्यापार प्रतिबंध

फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, डेनमार्क, स्पेन, फिनलैंड, आयरलैंड, आइसलैंड, नार्वे, पोलैंड, पुर्तगाल और स्वीडन समेत कुल बारह देशों ने मिलकर एक साझा घोषणा पत्र जारी किया था। इस घोषणा पत्र में इसराइली बस्तियों की वृद्धि को साफ तौर पर खारिज किया गया और इन क्षेत्रों से आने वाले सामानों पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार प्रतिबंध लगाने का संकल्प लिया गया। ओमान ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब एक मजबूत रुख अपनाना चाहिए ताकि फिलिस्तीन राज्य की स्वतंत्रता को सुनिश्चित किया जा सके। ओमान का मानना है कि 4 जून 1967 की सीमाओं के आधार पर ही फिलिस्तीन की आजादी का रास्ता साफ हो सकता है और इसके लिए व्यावहारिक कदम उठाने की बहुत जरूरत है। इस बारे में अधिक जानकारी QNA की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं

इस यूरोपीय पहल को यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख काजा कैल्लास का भी समर्थन प्राप्त हुआ। इस पहल के तहत विशेष रूप से E1 बस्ती परियोजना के लिए टेंडर जारी करने के फैसले की आलोचना की गई और वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाओं पर गहरी चिंता जताई गई। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति कार्यालय ने इस कदम को जवाबदेही की दिशा में एक बेहद जरूरी कदम बताया। दूसरी ओर, इसराइली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने इस अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को देश की चल रही राष्ट्रीय चुनाव प्रक्रिया में दखलअंदाजी करार दिया। इसके अलावा, ब्रिटिश विदेश सचिव एड मिलिबैंड ने भी इस आलोचना में अपनी सहमति जताई और वेस्ट बैंक में सुरक्षा व्यवस्था के लगातार बिगड़ते हालात पर चिंता व्यक्त की। ओमान के इस आधिकारिक रुख से साफ है कि खाड़ी देश फिलिस्तीनी मुद्दों पर अपने पुराने और स्पष्ट स्टैंड पर कायम हैं।

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