ओपेक प्लस की चेतावनी: भाड़े व बीमा से ऊर्जा सुरक्षा पर संकट

रियाद: ओपेक और गैर-ओपेक देशों के मंत्रियों ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को एक औपचारिक बयान जारी कर दुनिया भर में ऊर्जा के प्रवाह में आ रही गंभीर रुकावटों पर गहरी चिंता जताई है। ओपेक प्लस के इन मंत्रियों का कहना है कि समुद्री माल ढुलाई और बीमा का खर्च अब ऐसे स्तर पर पहुंच गया है, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया। यह खर्च कुल वस्तु मूल्य के एक-तिहाई से भी ज़्यादा हो चुका है, और इसका सीधा असर ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहा है।
यह बयान रियाद में 17वीं IEF मंत्रिस्तरीय बैठक और 25वीं WPC ऊर्जा कांग्रेस के दौरान सामने आया। मंत्रियों के मुताबिक, इतनी ऊंची लागत कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की समय पर और सुचारु आवाजाही में बाधा बन रही है। यानी तेल बाज़ार तक माल पहुंचने में देर हो रही है और खर्च बढ़ रहा है।
इस दबाव का असर सिर्फ़ जहाज़ों या बंदरगाहों तक सीमित नहीं है। मंत्रियों ने माना कि यह बोझ पूरी तेल आपूर्ति श्रृंखला में फैल रहा है। नतीजा यह हो सकता है कि महंगाई बढ़े और वैश्विक आर्थिक विकास की रफ़्तार धीमी पड़ जाए। सबसे ज़्यादा मार उत्पादक देशों के साथ-साथ उपभोक्ता देशों पर भी पड़ने वाली है।
इन हालात को देखते हुए ओपेक प्लस ने 7 जून 2026 को 41वीं ओपेक और गैर-ओपेक मंत्रिस्तरीय बैठक (ONOMM) में तय किए गए स्थिरीकरण के फ़ैसलों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही, समुद्री मार्गों की सुरक्षा को सबसे अहम बताया गया, ताकि दुनिया के बाज़ारों तक ऊर्जा की लगातार आपूर्ति बनी रहे।
आगे की रणनीति क्या होगी
मंत्रियों ने आगे की स्थिति पर लगातार नज़र रखने का वादा किया है। वे राष्ट्रीय सरकारों, उद्योग से जुड़े हितधारकों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों, जिनमें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा मंच (IEF) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) शामिल हैं, के साथ सक्रिय बातचीत करने की योजना बना रहे हैं। मकसद है कि मिलकर ऐसे उपाय खोजे जाएं जिनसे शिपिंग की स्थिति सुधरे और बाज़ार में उतार-चढ़ाव कम हो।
फ़िलहाल बयान में यह साफ़ नहीं किया गया है कि इन चर्चाओं का ठोस नतीजा कब तक सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि ऊंची माल ढुलाई और बीमा लागत अब सिर्फ़ तेल कंपनियों की चिंता नहीं रह गई है। इसका असर पेट