बाब अल-मंडब पर कब्जे के लिए यमन सरकार समर्थित बलों ने ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन शुरू किया
यमन सरकार समर्थित बलों ने बाब अल-मंडब पर कब्जे के लिए ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन शुरू किया, जिसमें 100 सैनिकों की मौत हुई।

यमन: यमन सरकार के साथ जुड़े अल-अमलीका दक्षिणी ब्रिगेड और नेशन्स शील्ड फोर्सेज ने बाब अल-मंडब इलाके की रणनीतिक पहाड़ियों और अहम ठिकानों पर नियंत्रण पाने के लिए 'ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन' शुरू किया है। इस सैन्य अभियान का मकसद समुद्री प्रवेश द्वार को पूरी तरह सुरक्षित करना है, जिसमें अरब गठबंधन की वायु सेना ने भी सहायता की है।
दिन भर चली भीषण लड़ाई में करीब 100 लोगों की जान गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों में 63 हूती लड़ाके और 34 सरकार समर्थक सैनिक शामिल हैं।
दूसरी तरफ हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने दावा किया है कि उनके बलों ने इस हमले को नाकाम कर दिया है। सारी ने आरोप लगाया कि इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी अदन स्थित एडवांस ऑपरेशनल बेस के कमांडर सऊदी अधिकारी बदर अल-हरबी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि हूती बलों ने बैलिस्टिक मिसाइलों और भारी हथियारों का इस्तेमाल कर सैन्य वाहनों को तबाह किया और काफी नुकसान पहुंचाया।
क्षेत्र में तनाव बढ़ता जा रहा है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने बताया कि 27 अक्टूबर को हूती बलों द्वारा सऊदी अरब की तरफ दागी गई तीन बैलिस्टिक मिसाइलों और चार ड्रोन को बीच में ही रोक दिया गया। हालांकि हूतियों ने रियाद में सऊदी रक्षा मंत्रालय और रास तनूरा तेल रिफाइनरी पर हमले का दावा किया, लेकिन सऊदी अधिकारियों ने केवल मिसाइलों को रोकने की पुष्टि की है।
इन घटनाओं से ठीक पहले 26 अक्टूबर को तेहरान में ईरान, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों की एक बैठक हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की गई। इसी बीच यह भी खबर आई है कि अक्टूबर के मध्य में बाब अल-मंडब जलडमरूमध्य के पास एक बेल्जियम माइनहंटर के करीब आई बैलिस्टिक मिसाइल को फ्रांसीसी नौसेना के युद्धपोत ने रोका था।